वर्तमान दुनिया में ट्रंप जिस प्रकार का व्यवहार कर रहे हैं, वह पूरी दुनिया के लिए एक तात्कालिक संदेश है।
वर्तमान दुनिया में ट्रंप जिस प्रकार का व्यवहार कर रहे हैं, वह पूरी दुनिया के लिए एक तात्कालिक संदेश है। ट्रंप का आचरण यह प्रमाणित करता है कि जिसके पास ताकत और धन होता है, वह पूरी दुनिया को गुलाम बनाने की क्षमता रखता है। लोकतंत्र एक ऐसा नाटक बन गया है, जो समाज को गुलाम बनाने के लिए भ्रम उत्पन्न कर रहा है।
लोकतंत्र कोई आदर्श समाधान नहीं रह गया है, क्योंकि यदि दुनिया में केवल ताकत और धन के बल पर ही स्वयं को स्थापित किया जा सकता है, तो यह लोकतंत्र की एक मूलतः गलत परिभाषा है। इससे यह प्रश्न स्वाभाविक रूप से खड़ा होता है कि लोकतंत्र का कोई विकल्प अब तक क्यों तैयार नहीं हो पाया।
मैंने इस विषय पर गंभीर चिंतन किया है। वर्तमान दुनिया में वास्तव में दो ही शक्तियों के बीच संघर्ष दिखाई देता है—एक ओर साम्यवादी तानाशाही है और दूसरी ओर अराजक लोकतंत्र। यह स्पष्ट है कि तमाम प्रयासों के बावजूद लोकतंत्र तानाशाही को प्रभावी चुनौती नहीं दे पा रहा है। इसका प्रमुख कारण यह है कि लोकतंत्र स्वयं में अपूर्ण है।
इसीलिए अब दुनिया को अराजक लोकतंत्र नहीं, बल्कि सहभागी लोकतंत्र चाहिए—संशोधित और परिष्कृत लोकतंत्र चाहिए। केवल इसी मार्ग से तानाशाही का मुकाबला किया जा सकता है। अन्यथा ट्रंप जैसे उन्मादी व्यक्तित्व कभी भी दुनिया को या तो अराजकता की ओर धकेल सकते हैं या उसे गुलामी की ओर ले जा सकते हैं।
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