विपक्ष की भूमिका या भ्रम: नेतृत्व पर उठते सवाल
बताया जाता है कि राहुल गांधी बहुत ही उच्च शिक्षित हैं और उनकी तुलना में नरेंद्र मोदी अल्प शिक्षित हैं। राहुल गांधी को विदेश की बड़ी-बड़ी डिग्रियाँ प्राप्त हैं, जो नरेंद्र मोदी के पास नहीं हैं, लेकिन राहुल गांधी अभी भी नासमझ शिक्षित माने जाते हैं और नरेंद्र मोदी समझदार अशिक्षित। यही दोनों में अंतर है।
राहुल की तुलना में सोनिया गांधी को बहुत चतुर राजनेता माना गया है, लेकिन पता नहीं सोनिया के संस्कार राहुल को क्यों नहीं मिल सके। आप वर्तमान समय में देखिए कि हमारे राहुल गांधी को इतना भी पता नहीं है कि एक विपक्ष का नेता सुझाव, मांग और विरोध—तीनों में क्या अंतर होता है।
सच बात यह है कि राहुल को इन तीनों का अंतर ही नहीं पता है। राहुल गांधी इस बात को जानते ही नहीं कि सुझाव क्या होता है, क्योंकि राहुल गांधी तो विरोध को ही सुझाव भी मान लेते हैं और विरोध को ही वह मांग भी मान लेते हैं।
कुछ दिनों पहले सोनिया जी ने यह मांग की थी कि महिला आरक्षण को तत्काल लागू कर दिया जाए। अब सरकार महिला आरक्षण को जल्दी लागू करने के लिए सहमत हो रही है, तो राहुल गांधी परेशान हो रहे हैं।
अभी कुछ दिन पहले ही राहुल गांधी ने ट्रंप के विरुद्ध सरकार को कई बार चेताया था। सरकार ट्रंप के जाल से बचने का प्रयत्न करने लगी। वही नासमझ राहुल गांधी अब यह प्रश्न उठा रहे हैं कि अमेरिका-ईरान युद्ध के बीच में पाकिस्तान इतना सम्मानित हो गया और भारत पीछे क्यों गया।
क्या भारत को पाकिस्तान के तरीके से ही ट्रंप के पैरों पर गिर जाना चाहिए था? इसलिए मैं बार-बार कहता हूँ कि राहुल को अकल नहीं है।
राहुल गांधी अपनी माँ की सेवा कर रहे हैं, यह बड़ी अच्छी बात है, लेकिन अगर थोड़ा सा माँ की अकल ले लेते, तो अधिक अच्छा होता।
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