तानाशाही के विरुद्ध आवाज: ईरान की व्यवस्था पर सवाल

ईरान और अमेरिका के बीच जो लड़ाई चल रही है, उस लड़ाई में मैं ईरान की सरकार के विरुद्ध हूँ, क्योंकि ईरान की जनता किसके साथ है, यह बात अब तक साफ नहीं हुई है।

ईरान में कर्फ्यू लगा हुआ है, इंटरनेट बंद है, लोगों को सड़क पर निकलकर सरकार के खिलाफ कुछ भी बोलने पर गोली मारने तक का आदेश है। ऐसी परिस्थितियों में ईरान की जनता किसके साथ है, यह बात स्पष्ट नहीं है, जबकि अमेरिका में लोकतंत्र है।

इसलिए ईरान चाहे सही हो या गलत, लेकिन हम ईरान का समर्थन नहीं कर सकते, क्योंकि ईरान एक तानाशाही देश है। ईरान किसी धर्मगुरु के नियंत्रण में है। ईरान के राष्ट्रपति को भी लगभग बंधक बना लिया गया है; उसे भी बोलने की स्वतंत्रता नहीं है।

ईरान की सरकारी सेना भी लगभग मूकदर्शक बनी हुई है, क्योंकि ईरान को कुछ धर्मगुरुओं ने बंधक बना लिया है।

मैं ट्रंप के साथ नहीं हूँ, मैं ईरान की जनता के विरुद्ध नहीं हूँ—मैं विरुद्ध हूँ ईरान की तानाशाही के। मैं जानता हूँ कि वर्तमान समय में जितनी ताकत अमेरिका के पास है, ट्रंप के पास है, यदि उतनी ताकत और जुगाड़ ईरान के धर्मगुरुओं के पास होती, तो दुनिया का क्या हाल होता।

भारत के भी लगभग सभी तानाशाह ईरान के समर्थन में खड़े हैं, क्योंकि उन्हें तानाशाही में ही मज़ा आता है, लेकिन मैं इस तरह के तानाशाहों के साथ नहीं हूँ।

ईरान जीतेगा या हारेगा, यह ईरान और अमेरिका का मामला है; मैं ईरान के तानाशाहों को हारते हुए देखना चाहता हूँ, परिणाम चाहे जो हो।