मेरी वैचारिक यात्रा: आर्य समाज से वर्तमान तक

मैं बचपन से ही आर्य समाज से जुड़ा रहा और लगभग 15 वर्ष की उम्र में राम मनोहर लोहिया से बहुत प्रभावित हो गया। मेरी विचारधारा बिल्कुल स्पष्ट रही कि मैं साम्यवादी विचारधारा, नेहरू परिवार और इस्लामिक कट्टरवाद के पूरी तरह विरुद्ध हो गया। मैं नरम हिंदुत्व का पक्षधर रहा और संघ के साथ अच्छे संबंध होने के बाद भी मैं उग्र हिंदुत्व का विरोध करता रहा। मैं हमेशा गोडसे के विरुद्ध रहा। मैंने प्रवीण तोगड़िया, संजय रावत, प्रज्ञा ठाकुर, सुब्रमण्यम स्वामी—इन लोगों का कभी समर्थन नहीं किया, क्योंकि मैं नरम हिंदुत्व का पक्षधर था। संघ पर इन सबका बहुत प्रभाव था, संघ उग्र हिंदुत्व की भाषा बोलता था, इसलिए मेरा उनसे हमेशा मतभेद रहा।

लेकिन मतभेद होने के बाद भी मैं नेहरू परिवार, साम्यवाद और उग्र इस्लाम के विरुद्ध निरंतर सक्रिय रहा। धीरे-धीरे संघ ने अपनी दिशा बदली। प्रवीण तोगड़िया, प्रज्ञा ठाकुर, सुब्रमण्यम स्वामी, संजय रावत तथा अन्य ऐसे ही उग्र हिंदुत्व वाले लोगों से संघ ने दूरी बनानी शुरू कर दी, और इस तरह धीरे-धीरे मेरा संघ के साथ संपर्क अच्छा होता चला गया। वर्तमान समय में यह सिद्ध हो चुका है कि संघ एकमात्र वह संस्था है जो भारत को सही दिशा दे रही है। अब संघ नरम हिंदुत्व का प्रतिनिधित्व कर रहा है।

अब प्रवीण तोगड़िया, संजय रावत, सुब्रमण्यम स्वामी तथा इस प्रकार के सभी लोग राहुल गांधी से सांठगांठ करके युद्ध की भाषा बोल रहे हैं। आज का दुर्भाग्य है कि गांधी का नाम लेने वाली और गांधी टोपी की पक्षधर कांग्रेस पार्टी दिन-रात युद्ध की भाषा बोल रही है—पाकिस्तान से लड़ जाओ, चीन से भिड़ जाओ, अमेरिका से झगड़ा मोल ले लो। दिन-रात गोडसे की भाषा कांग्रेस पार्टी बोल रही है, और दूसरी ओर संघ नरम हिंदुत्व की भाषा बोल रहा है।

मैं वर्तमान भारत सरकार और संघ की वर्तमान दिशा से पूरी तरह संतुष्ट हूँ। यदि प्रवीण तोगड़िया सरीखे लोगों से और जल्दी संघ दूर हो जाता, तो देश के लिए और अधिक अच्छा होता। अब राहुल की तोगड़िया से सांठगांठ और अधिक तेज़ी से राहुल को खत्म करेगी। भारत बुद्ध का देश है, शांति का संदेश देता है। भारत कभी युद्ध का समर्थन नहीं करेगा।