बिचौलियों का बढ़ता प्रभाव और समाज पर खतरा

भारत में एक बिचौलियों की ऐसी जमात खड़ी हो गई है जो कोई उत्पादन नहीं करते हैं, बल्कि यह बीच में हराम का खाते हैं। ऐसे बिचौलिए समाज की सबसे बड़ी समस्या बन गए हैं। इनमें सबसे बड़ी भूमिका राजनेताओं की होती है, दूसरी भूमिका मीडिया वालों की भी मानी जाती है। यह दोनों ही बिचौलियों का काम करते हैं।

आप कोई भी टीवी चैनल उठाकर देख लीजिए, कोई भी अखबार पढ़ लीजिए, किसी भी नेता का भाषण सुन लीजिए—दोनों सिर्फ समाज में झूठ बोलते मिलेंगे।

अभी अमेरिका और ईरान का युद्ध हो रहा है। यह बात साफ है कि भारत में इससे न महंगाई बढ़ी है, न महंगाई घटी है, क्योंकि जो वस्तुएं विदेश से आती हैं, वे सभी महंगी हुई हैं और जो भारत से जाती हैं, वे सभी वस्तुएं सस्ती हुई हैं।

आज ही यह समाचार आया है कि डीजल, पेट्रोल और गैस महंगी हो गई है, आवागमन महंगा हो गया है। साथ में यह भी समाचार आया है कि प्याज सस्ता हो गया है, टमाटर सस्ता हो गया है, आलू का कोई खरीदार नहीं है। अनाज के दाम भी लगातार घट रहे हैं।

मैं नहीं समझ पाया कि भारत में महंगाई कैसे बढ़ गई। किन लोगों पर इस महंगाई का प्रभाव पड़ रहा है, यह न नेता बताने को तैयार हैं, न मीडिया बताने को तैयार है।

जबकि भारत की आम जनता जानती है कि न कुछ महंगा हुआ है, न कुछ सस्ता हुआ है। जो लोग अनाज, कपड़ा, सब्जी का उपयोग करते हैं, वे सब सस्ती हुई हैं। जो लोग खनिज तेल और गैस का उपयोग करते हैं, वह महंगी हुई हैं।

लेकिन पूरे भारत पर महंगाई का कोई व्यापक प्रभाव नहीं पड़ा है। यह बिचौलिए चिल्ला-चिल्लाकर समाज में एक भ्रम पैदा कर रहे हैं कि महंगाई बढ़ रही है, जबकि महंगाई सिर्फ इन बिचौलियों के लिए बढ़ी है, आम जनता के लिए नहीं। हराम का खाने वाले परेशान हो रहे हैं, मेहनत करने वाले नहीं।