अमेरिका–ईरान संघर्ष: रणनीति, सत्ता और असफल योजनाएं
अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप की योजना बिल्कुल सही थी, लेकिन परिस्थितियां वैसी नहीं बन सकीं। खामनेई के मारे जाने के बाद ईरान के राष्ट्रपति को सत्ता संभालनी थी, लेकिन तत्काल ही खामनेई की सेना ने ईरान के राष्ट्रपति और ईरान की सरकारी सेना पर अपना नियंत्रण स्थापित कर लिया और ट्रंप की योजना असफल हो गई।
वर्तमान समय में ईरान के राष्ट्रपति और ईरान की सेना नाम मात्र के अधिकार रखती है और उन्हें खामनेई की सेना के कहे अनुसार कार्य करना पड़ रहा है। यही कारण है कि अमेरिका या राष्ट्रपति ट्रंप ईरान के मामले में कोई अंतिम निष्कर्ष तक नहीं पहुंच पा रहे हैं।
ईरान के राष्ट्रपति युद्ध समाप्त करना चाहते हैं, लेकिन उनके सारे अधिकार निलंबित कर दिए गए हैं। अब तो यही मार्ग दिखता है कि युद्ध लंबा चल सकता है।
लेकिन यह युद्ध किसी बड़े विश्व युद्ध में बदल सके, ऐसी अभी कोई संभावना नहीं है, क्योंकि ट्रंप और इज़राइल भी काफी हद तक अकेले पड़ गए हैं। नाटो तथा अन्य देश तटस्थ रुख अपनाए हुए हैं। भारत तो पूरी तरह तटस्थ है, लेकिन ईरान भी अकेला पड़ गया है—कई मुस्लिम देश भी उसका खुलकर साथ नहीं दे रहे हैं।
इसलिए यह युद्ध अमेरिका और ईरान तक ही सीमित रहने की संभावना है। इससे भारत को कुछ लाभ भी हो सकता है, इसलिए भारत इस स्थिति से अत्यधिक चिंतित नहीं है। धीरे-धीरे भारत तेल की खपत के मामले में आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ सकता है।
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