समान नागरिक संहिता: धर्मनिरपेक्ष भारत की आवश्यकता

5 अप्रैल प्रातःकालीन सत्र। हम भारत में समान नागरिक संहिता को बहुत अधिक महत्वपूर्ण मान रहे हैं, क्योंकि हम भारत में धर्मनिरपेक्ष सरकार चाहते हैं। किसी भी धर्म को मानना किसी व्यक्ति की स्वतंत्रता है, लेकिन सरकार किसी धर्म की नहीं होनी चाहिए। हम हिंदू राष्ट्र के भी पक्ष में नहीं हैं। हम समान नागरिक संहिता चाहते हैं।

लेकिन यह बात भी सच है कि यदि मुस्लिम राष्ट्र या ईसाई राष्ट्र का खतरा पैदा होगा, तो हम हिंदुओं को एकजुट करेंगे, भले ही वह हिंदू राष्ट्र का ही नारा क्यों न हो। सौभाग्य से वर्तमान समय में भारत में मुस्लिम राष्ट्र का कोई खतरा नहीं दिखता है, और यदि इस्लामी राष्ट्र का खतरा नहीं रहेगा, तो हम हिंदू राष्ट्र के पक्ष में नहीं हैं।

हम मुसलमान को भी एक व्यक्ति के रूप में बराबरी का अधिकार देना चाहते हैं। हम इस बात के पक्ष में नहीं हैं कि जिस तरह मुसलमानों ने नेहरू परिवार के साथ मिलकर हिंदुओं के साथ दूसरे दर्जे का व्यवहार किया, उसी तरह हम मुसलमानों के साथ भी व्यवहार करें—यह हिंदुत्व नहीं है।

फिर भी, यदि भारत का मुसलमान एकजुट होकर समान नागरिक संहिता का विरोध करेगा, तब ऐसी स्थिति में हम मुसलमानों का भी विरोध कर सकते हैं, क्योंकि समान नागरिक संहिता को हमने लक्ष्य बनाया है।