इजरायल–ईरान युद्ध में भारत की संतुलित नीति और प्रभावी प्रबंधन

वर्तमान इजरायल-ईरान युद्ध में भारत सरकार ने जिस तरह कमाल का काम किया है, उसके लिए सरकार को बधाई देनी चाहिए। युद्ध के एक-दो दिनों के अंदर ही ऐसा लग रहा था कि अफरा-तफरी का माहौल बन जाएगा। सभी विपक्षी दल अनेक तरह के प्रचार करने लगे। कोई कहने लगा कि सब कुछ बंद हो जाएगा, कोरोना के समान लॉकडाउन हो जाएगा, तेल देखने को नहीं मिलेगा, गैस नहीं मिलेगी।

लेकिन 36 दिन युद्ध को हो गए हैं और अब तक भारत में कहीं ऐसी अफरा-तफरी नहीं दिख रही है। नेपाल में दो दिनों तक सरकारी ऑफिस बंद किए जा रहे हैं। पाकिस्तान में भी सप्ताह में 2 दिन लॉकडाउन रहेगा। श्रीलंका भी परेशान है। दुनिया का कोई ऐसा देश नहीं है जो इस युद्ध के कारण तेल और गैस से परेशान न हो। जहाँ तेल और गैस का उत्पादन होता है, वह देश भी परेशान है और जहाँ खपत होती है, वह भी परेशान है।

लेकिन भारत एकमात्र ऐसा देश है जो अभी तक इस परेशानी से लगभग मुक्त है। बहुत थोड़ा सा डीजल, पेट्रोल और गैस की कीमत बढ़ी है, लेकिन जितनी इन वस्तुओं की कीमतें बढ़ी हैं, उससे अधिक अनाज, सब्जी, अन्य खाद्य पदार्थ और कपड़े सस्ते भी हुए हैं। आम लोगों के बीच में न कोई डर है, न कोई चिंता। आवागमन कुछ कम हुआ है, जिससे खास लोगों को थोड़ी कठिनाई हुई है और आम लोगों को बहुत राहत मिली है।

भारत सरकार ने इस युद्ध में इजरायल, ईरान, अमेरिका, रूस और चीन—सभी के बीच अपना एक अलग मार्ग बनाया। यह कोई साधारण बात नहीं थी। हमें पूरा विश्वास था कि भारत इस कठिन परीक्षा को भी पार कर जाएगा, और नरेंद्र मोदी व मोहन भागवत की मिली-जुली व्यवस्था ने हमारी उम्मीदें पूरी की हैं। यदि यह युद्ध कुछ दिन और चल जाए और भारत इसी तरह परिस्थितियों को संभाल ले, तो स्वाभाविक है कि आम और खास के बीच कुछ दूरी घट जाएगी।