“जन-केन्द्रित पुलिस सुधार: ‘तुम सोते रहो, हम जाग रहे हैं’ आधारित सुरक्षा मॉडल”

17 अप्रैल प्रातः कालीन सत्र। हम नई संवैधानिक और राजनीतिक व्यवस्था के अंतर्गत भारत के प्रत्येक नागरिक को इस बात की गारंटी देंगे कि चोरी, डकैती और लूट के भय से वह पूरी तरह सुरक्षित रहेगा। किसी भी प्रकार से यदि किसी नागरिक की संपत्ति में चोरी, डकैती या लूट की घटना होती है तो सरकार उन अपराधियों को पकड़ कर लाएगी, उन्हें न्यायालय से दंडित भी कराएगी और साथ ही जिन लोगों के साथ ऐसी घटना हुई है, उनकी क्षतिपूर्ति भी करेगी। हम गांव-गांव में जासूसों का जाल भी फैलाएंगे। हम यह भी प्रयत्न करेंगे कि चोरी, डकैती और लूट के मामलों में वर्तमान कानून की तुलना में अधिक कड़े दंड दिए जाएं। हम कठोर दंड का प्रावधान करेंगे। हम जेल को सुधार गृह नहीं, बल्कि जेलों को दंड गृह बनाएंगे। इस तरह नई व्यवस्था पूरे समाज को चोरी, डकैती और लूट से सुरक्षित रहने की गारंटी देगी। हमारी पुलिस रात को यह आवाज नहीं करेगी कि “जागते रहो”, हमारी पुलिस आम जनता से यह कहेगी कि “तुम सोते रहो, हम जाग रहे हैं।” यह वर्तमान व्यवस्था और नई व्यवस्था में एक फर्क होगा।