नाशिक में कथित धर्म परिवर्तन मामले ने खड़े किए सवाल: जांच और सच्चाई पर नजर

भारत में जैसे-जैसे हिंदुओं का मनोबल बढ़ रहा है वैसे-वैसे नए-नए खुलासे हो रहे हैं। उत्तर प्रदेश में बहुत से ऐसे मुसलमान पकड़े जा चुके हैं जो दिन-रात धर्म परिवर्तन के अलावा कुछ करते ही नहीं थे। इन्हें विदेश से धन मिलता था राजनेताओं से प्रोत्साहन मिलता था अफसर से सुरक्षा मिलती थी और यह धड़ल्ले से साम दाम दंड भेद सबका उपयोग करके महिलाओं का धर्म परिवर्तन किया करते थे। इसी कड़ी में अब महाराष्ट्र के नासिक में एक बड़े औद्योगिक इकाई में काम करने वाले समूह की प्रमुख निदा खान का भी मामला सामने आया है जो अभी फरार है। वह एक गिरोह बनाकर वहां के महिलाओं को धर्म परिवर्तन के लिए प्रेरित या मजबूर करती थी। उन्हें पकड़ने के लिए भी सरकार को एक जाल बिछाना पड़ा और तब किसी तरह यह भेद खुल सका। अब तो सारा मामला उजागर हो गया है कि किस तरह यह धर्म परिवर्तन का रैकेट चालू था। अमरावती में भी कुछ इस तरह की बातें सुनने में आ रही हैं कि वहां भी कोई व्यक्ति कुछ लोगों के साथ मिलकर इस तरह का प्रयत्न कर रहा था सारी घटनाएं उजागर होने के बाद यह बात सिद्ध हो गई है की यह धर्म परिवर्तन का षड्यंत्र लंबे समय से चल रहा था और इसमें प्रशासन की सभी इकाइयों का कुछ ना कुछ योगदान था। अब नई सरकार के आने के बाद धीरे-धीरे प्रशासन की अन्य इकाइयों में भी बदलाव हो रहा है और तब हिंदुओं का मनोबल बढ़ रहा है। धर्म परिवर्तन करने वालों की हिम्मत भी टूट रही है और नए-नए मामले हमेशा सामने आते जा रहे हैं। हिंदुओं के नाम पर लंबे समय तक दुकानदारी करने वाले उद्धव ठाकरे भी इस प्रकार की घटनाएं आने के बाद लज्जित हैं कि वह अपने शासनकाल में इन घटनाओं को नहीं रोक सके।