नई समाज व्यवस्था में बलात्कार की परिभाषा पर पुनर्विचार: सहमति, बल और कानून की नई बहस
18 Apr 26 00:04
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नई समाज व्यवस्था में बलात्कार की परिभाषा पर पुनर्विचार: सहमति, बल और कानून की नई बहस
18 अप्रैल, प्रातःकालीन सत्र। नई समाज व्यवस्था पर चर्चा।
हम नई समाज व्यवस्था में बलात्कार को अलग तरह से परिभाषित करेंगे। बलात्कार हम तभी मानेंगे, जब उसमें बल प्रयोग हो या उसमें कोई गंभीर धोखाधड़ी हो। यदि बल प्रयोग करने वाले की मंशा बलात्कार की नहीं है, तब भी उसे बलात्कार नहीं माना जाएगा। मामूली छेड़छाड़ की घटनाओं को बलात्कार से बाहर कर दिया जाएगा। सहमति से हुआ सेक्स किसी भी रूप में बलात्कार नहीं माना जाएगा।
यदि कोई शादी के लिए आश्वासन देकर शादी न करे, तब भी उसे बलात्कार नहीं माना जाएगा; उसे केवल समझौते का उल्लंघन माना जाएगा। इस तरह वर्तमान समय में जो बलात्कार की घटनाएँ हैं, वे घटकर दो-चार प्रतिशत ही रह जाएँगी।
बलात्कार से होने वाले दंड की तुलना में डकैती या हत्या में अधिक गंभीर दंड बनाए जाएँगे। हम बलात्कार को हत्या या डकैती की तुलना में कम गंभीर समझेंगे। महिला सशक्तिकरण के नाम पर समाज का बँटवारा करने की योजना हम असफल करेंगे।
इस तरह नई व्यवस्था में हम बलात्कार को गंभीर अपराध मानेंगे, लेकिन हत्या को उससे भी अधिक गंभीर अपराध मानेंगे।
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