पवन खेड़ा का मामला: न्यायपालिका के बदलते रुख
भारत की न्यायपालिका समय-समय पर विलक्षण कार्य करते रहती है। कांग्रेस पार्टी के एक बड़े प्रवक्ता पवन खेड़ा का मामला भी ऐसा ही है। पवन खेड़ा को बड़ी आसानी से तमिलनाडु उच्च न्यायालय ने अग्रिम जमानत दे दी और उतनी ही आसानी से सुप्रीम कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत रद्द भी कर दी। यहां तक की पवन खेड़ा ने फिर दोबारा जाकर सुप्रीम कोर्ट में प्रार्थना की उसे सिर्फ दो दिन की जमानत दे दी जाए लेकिन सुप्रीम कोर्ट इसके लिए भी तैयार नहीं हुआ। वहीं सुप्रीम कोर्ट है जो करीब 6 महीने पहले किसी एक बहुत गंभीर मामले में लीक से हटकर पवन खेड़ा को राहत दिया था। उस समय भी वही वकील थे वही पवन खेड़ा थे और आज भी वही थे। उस समय उन्हें लिक से हटकर राहत दी गई थी और आज उनके साथ बिल्कुल अलग तरह का व्यवहार हुआ। आज पवन खेड़ा का घमंड कमजोर पड़ गया है। इसी तरह राहुल गांधी का भी मामला है। उत्तर प्रदेश उच्च न्यायालय ने राहुल गांधी पर इस मामले में मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिया है कि राहुल गांधी पर देश को धोखा देकर विदेशी नागरिकता रखने का पुष्ट संदेह दिखता है । आप विचार करिए कि यह बात लंबे समय से सुनी जा रही थी लेकिन अब इतने लंबे समय बाद न्यायपालिका को इस मामले में हस्तक्षेप करना पड़ा है। अब लगता है कि राहुल गांधी और पवन खेड़ा दोनो को न्यायालय का सामना करना पड़ेगा। राहुल गांधी और पवन खेड़ा दोनों कई बार यह कह चुके हैं की कानून के सामने देर भले ही हो लेकिन अंधेर नहीं है।
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