अतिवाद, संतुलनवाद और यथार्थवाद का जीवन अनुभव
मैंने अपने जीवन में चार वादों का अनुभव किया है। पहला है अतिवाद, दूसरा है संतुलनवाद, तीसरा है यथार्थवाद और चौथा है पलायनवाद। अतिवाद के तरफ बहुत अधिक आकर्षण होता है और पलायनवादी भावना-प्रधान होने के कारण अतिवाद के साथ जुड़ जाया करते हैं, लेकिन सबसे बड़ा खतरा भी अतिवाद ही है। संतुलनवाद और यथार्थवाद आपस में लगभग मिलते-जुलते हैं। इनमें संतुलनवाद की तुलना में यथार्थवाद को अधिक अच्छा माना जाता है, लेकिन यथार्थवाद कुछ कठिन प्रक्रिया है। मैं अपने पूरे जीवन में संतुलनवादी रहा और यथार्थवाद की दिशा में धीरे-धीरे आगे बढ़ने का प्रयास करता रहा। हम बात करते हैं अतिवाद की। अतिवादियों में नक्सलवादी, मुस्लिम आतंकवादी, अंबेडकरवादी और सावरकरवादी—ये सभी शामिल होते हैं। अतिवादियों में कुछ लोग आतंकवादी हो जाते हैं और कुछ लोग उग्रवादी हो जाते हैं, लेकिन ये लोग कभी संतुलनवादी नहीं होते; यथार्थवादी होने का तो कोई प्रश्न ही नहीं है। हमारी यह मजबूरी हो जाती है कि हम सब प्रकार के अतिवाद से एक साथ नहीं निपट सकते, इसलिए हमें नक्सलवाद का सफाया करने के लिए अन्य अतिवादियों की मदद लेनी पड़ती है। वर्तमान स्थिति में हमें इस्लामी आतंकवाद का सफाया करने के लिए अंबेडकरवादियों और हिंदू आतंकवादियों की भी मदद लेना मजबूरी बन गई है, लेकिन अतिवादियों के नेतृत्व में किसी भी प्रकार का कोई भी प्रयास बहुत घातक होता है। वर्तमान समय में मुस्लिम आतंकवाद भी लगातार दम तोड़ रहा है। ऐसी स्थिति में हिंदू आतंकवाद लगातार सिर उठाने का प्रयास कर रहा है, जो हम सब संतुलनवादियों या यथार्थवादियों के लिए एक परीक्षा की घड़ी है। हम मुस्लिम आतंकवाद को समाप्त करने के उद्देश्य से हिंदू आतंकवादियों को सहन तो कर सकते हैं, लेकिन हिंदू आतंकवाद को हम कभी भी नेतृत्व नहीं करने देंगे। मुस्लिम आतंकवाद कमजोर पड़ रहा है और हमारे सामने हिंदू आतंकवाद का संकट खड़ा होता जा रहा है। इसलिए वर्तमान समय में हम सब संतुलन बनाकर रखने वाले लोग हिंदू आतंकवाद के खतरों से सावधान हो जाएँ। अतिवाद हमेशा बुरा होता है। अतिवाद हिंदू-मुसलमान में बाँटकर नहीं देखा जा सकता, लेकिन दोनों का एक होना भी बहुत खतरा है, इसलिए वर्तमान सरकार बहुत फूँक-फूँक कर कदम रख रही है। हम सब संतुलनवादी या यथार्थवादी लोगों को सावरकरवादियों से सावधान हो जाना चाहिए। हम किसी भी प्रकार के अतिवाद के विरोधी हैं।
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