महंगाई बनाम विकास: सच्चाई क्या है?
भारत को स्वतंत्र हुए लगभग 80 वर्ष हो रहे हैं। मैंने भी स्वतंत्रता से लेकर आज तक यह अनुभव किया है कि सभी राजनीतिक दल जनता के बीच में यह प्रचार करते हैं कि महंगाई बढ़ रही है। साथ ही यह भी कहते हैं कि कुल विकास दर हमारी ऊंची है। तीसरी बात यह भी कही जाती है कि आम लोगों का जीवन स्तर ऊंचा हो रहा है। चौथी बात यह भी कही जाती है कि महंगाई का जीवन स्तर पर हमेशा बुरा प्रभाव पड़ता है। अब ये चारों बातें हर राजनीतिक दल 80 वर्ष से लगातार कह रहा है, आज भी वही बात कह रहा है। जो विपक्ष में होता है, वह महंगाई बढ़ने का हल्ला करता है और सत्ता पक्ष उसके समाधान करने का आश्वासन देता है। लेकिन आप अगर गंभीरता पूर्वक सोचेंगे, तो सभी राजनीतिक दल समाज के सामने सिर्फ झूठ बोल रहे हैं और कुछ नहीं है, क्योंकि ये चारों बातें एक साथ संभव ही नहीं हैं। किसी व्यक्ति का जीवन स्तर भी ऊंचा हो, महंगाई भी बढ़ती रहे, महंगाई का जीवन स्तर पर प्रभाव भी बुरा हो और विकास भी होता रहे—यह कैसे संभव है? मेरा अपना अनुभव है कि मुद्रा स्थिति को महंगाई के नाम पर झूठ प्रचारित किया जा रहा है। समाज को धोखा दिया जा रहा है और इस धोखे में विपक्ष और सत्तारूढ़ दल दोनों एक साथ खड़े हैं। आज भी आप देख लीजिए कि सारे विपक्षी दिन-रात, सपने में भी, महंगाई बढ़ने का हल्ला करते रहते हैं, जबकि सच्चाई ठीक उलट है। जीवन स्तर ऊंचा हो रहा है, लोगों की क्रय शक्ति बढ़ रही है, महंगाई घट रही है, महंगाई का कोई बुरा प्रभाव नहीं है। गरीब धीरे-धीरे आगे बढ़ रहा है, अमीर बहुत तेजी से आगे बढ़ रहा है। इतना सच सामने होने के बाद भी ये राजनीतिक दल झूठ पर झूठ बोले जा रहे हैं।
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