नई समाज व्यवस्था: टैक्स समाप्ति और कृत्रिम ऊर्जा आधारित अर्थव्यवस्था

5 मई, प्रातःकालीन सत्र। वैसे तो आज दिन भर चुनाव चर्चा करनी थी, लेकिन प्रातःकालीन सत्र में मैंने नई समाज व्यवस्था पर चर्चा उचित समझा। नई व्यवस्था में हम सब प्रकार के टैक्स समाप्त कर देंगे। यदि आर्थिक असमानता बहुत अधिक बढ़ी हुई रहेगी, तो हम आम लोगों को सरकार से नगद सहायता भी देंगे। इसके बदले में जितने भी धन की जरूरत होगी, वह सारा धन कृत्रिम ऊर्जा से लिया जाएगा। कोई भी अन्य टैक्स नहीं लगाया जाएगा। आवागमन को इतना महंगा होने दिया जाएगा कि गांव-गांव के उद्योग अपने आप बढ़ने लगें। कृत्रिम ऊर्जा की खपत इस सीमा तक कम होने दी जाएगी कि हमारा पर्यावरण प्रदूषित न हो और हमें किसी प्रकार के डीजल-पेट्रोल के आयात की जरूरत न पड़े।

श्रम का मूल्य उस सीमा तक बढ़ने दिया जाएगा कि इससे भारत में श्रम और बुद्धि के बीच की दूरी घट जाए। शिक्षा पर किया जाने वाला सारा बजट रोक दिया जाएगा। स्वास्थ्य पर भी सरकार कोई खर्च नहीं करेगी, क्योंकि गरीब लोगों का जीवन स्तर स्वयं इतना ऊंचा हो जाएगा कि वे शिक्षा और स्वास्थ्य का खर्च खुद संभाल सकेंगे। सरकार पर हमारी निर्भरता बहुत कम हो जाएगी।

यदि जरूरत पड़ेगी, तो हम डीजल, पेट्रोल, बिजली का मूल्य ढाई गुना तक बढ़ा सकते हैं, लेकिन हम आर्थिक विषमता को अवश्य ही कम करेंगे। हम श्रम और बुद्धि के बीच के अंतर को कम करेंगे, हम शहर और गांव के अंतर को कम करेंगे, और इसका सबसे रामबाण इलाज है कृत्रिम ऊर्जा मूल्य वृद्धि।