“मुसलमान नासमझा होता है” — इतिहास, राजनीति और बदलते समय पर एक टिप्पणी
16 May 26 00:05
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“मुसलमान नासमझा होता है” — इतिहास, राजनीति और बदलते समय पर एक टिप्पणी
मैं बहुत पहले से लिखता रहा हूं कि मुसलमान नासमझा होता है। आज मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने भोजशाला पर भी निर्णय दिया कि वह हिंदू मंदिर है। धीरे-धीरे ऐसे अनेक स्थान मुसलमानों के हाथ से निकलते जाएंगे, क्योंकि जहां भी किसी मस्जिद के नीचे खुदाई की जाएगी, वहां मंदिर के कोई-न-कोई प्रमाण मिल ही जाएंगे।
मुझे याद है कि एक समय हिंदू पक्ष मुसलमानों से अयोध्या, काशी और मथुरा — इन तीन मंदिरों पर समझौता करने के लिए तैयार था। लेकिन उस समय मुसलमानों की समर्थक सरकार थी और उसने एक भी जगह छोड़ने से इनकार कर दिया, क्योंकि उस समय के मुसलमानों को सरकार पर भरोसा था, न्यायालय पर भरोसा था और अपनी एकता पर भरोसा था। उन्हें यह पता ही नहीं था कि जमाना बदल भी सकता है।
आज अयोध्या का मामला निपट चुका है। मथुरा और काशी भी निपटने वाले हैं और देश में कई जगह दावे किए जा चुके हैं। भोजशाला का मामला भी आज हाई कोर्ट से निपट गया है।
मुसलमानों के लिए यह कहावत चरितार्थ होती है कि “समझौते से 1 इंच नहीं देंगे”, लेकिन हिंदू एकता की ताकत पर एक फुट देने के लिए तैयार हैं। अभी भी कुछ नहीं बिगड़ा है। मुसलमानों को आगे आकर हिंदुओं को बराबरी का अधिकार मान लेना चाहिए।
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