नई समाज व्यवस्था की ओर सामूहिक यात्रा

18 में प्रातःकालीन सत्र।

मैं नई समाज व्यवस्था पर प्रतिदिन प्रातःकाल एक पोस्ट लिखता हूं। मैं जो कुछ भी लिखता हूं, उसके पहले लंबे समय तक चिंतन करता हूं। चिंतन के बाद विपरीत विचारों के लोगों को एक साथ जोड़कर मंथन करता हूं। मंथन के बाद एकांत में बैठकर कुछ निष्कर्ष निकालता हूं और वह निष्कर्ष जनहित में प्रातःकाल आपके सामने मक्खन के रूप में प्रस्तुत करता हूं। यह मक्खन केवल मेरा अकेले का विचार नहीं है, बल्कि बहुत लोगों के साथ चिंतन-मंथन करने के बाद निकला हुआ निष्कर्ष है।

प्रातःकाल के बाद मैं दो-तीन और पोस्ट करता हूं, जो लगभग मठा होती हैं, जो सामान्य चर्चा के लिए होती हैं। मैं यह महसूस करता हूं कि वर्तमान दुनिया में युग परिवर्तन का समय आ गया है और इस युग परिवर्तन में हम सबकी भी कोई न कोई सक्रिय भूमिका होनी चाहिए।

इस संस्था में अलग-अलग प्रकार के लोग जुड़कर अलग-अलग तरीके से काम कर रहे हैं। कुछ लोग चिंतन करते हैं, मंथन करते हैं और कुछ लोग क्रिया भी करते हैं। आज भी इस टीम के लोग उड़ीसा में इस दिशा में यात्रा कर रहे हैं। इस तरह हमारे अनेक साथी इस व्यवस्था परिवर्तन और युग परिवर्तन की दिशा में सक्रिय हैं।

आप भी चाहें तो इस कार्य में जुड़ सकते हैं। आप जब चाहें तब रात 7:30 बजे ज़ूम पर चिंतन-मंथन में भाग ले सकते हैं। आप जब चाहें तब अपने क्षेत्र में एक छोटी-सी बैठक रखकर हमारे साथियों को आमंत्रित कर सकते हैं। आप जब चाहें तब हमारी संस्था के मित्रों के साथ मोबाइल पर या ज़ूम पर प्रत्यक्ष संवाद कर सकते हैं। आप जब चाहें तब हमारी वेबसाइट पर हम लोगों का पूरा साहित्य भी पढ़ सकते हैं।

व्यवस्था परिवर्तन और युग परिवर्तन के इस कार्य में हम और आप यथाशक्ति मिलकर साथ चलें। आप इस कार्य में सहभागी के रूप में भी जुड़ सकते हैं, विरोधी के रूप में भी जुड़ सकते हैं, समीक्षक और आलोचक के रूप में भी जुड़ सकते हैं। आप जैसा चाहें, आपकी पूरी स्वतंत्रता है।

हम आपका इस कार्य में सहयोग करेंगे, सम्मान भी करेंगे। आप यदि आगे बढ़कर इसमें कुछ करना चाहते हैं, तो हमारी टीम का आपको पूरा सहयोग मिलेगा। पूरी दुनिया में जो भी लोग इस दिशा में सक्रिय होंगे, हमारी पूरी टीम उनके साथ खड़ी है। हम और आप मिलकर विचारों का आदान-प्रदान कर सकते हैं।