नई समाज व्यवस्था में महिला-पुरुष समानता का सिद्धांत
4 जून प्रातःकालीन सत्र
नई समाज व्यवस्था में हम महिला-पुरुष का सारा भेद समाप्त कर देंगे। कानून में और संविधान में व्यक्ति एक इकाई होगा, महिला और पुरुष नहीं। हम इस निर्णय तक पहुँच चुके हैं कि महिलाओं और पुरुषों के बीच टकराव के लिए सरकार ने अनेक कानून बनाए हैं।
महिला और पुरुष के बीच दूरी घटनी चाहिए या बढ़नी चाहिए, यह उनका या तो व्यक्तिगत मामला है या पारिवारिक मामला है। सरकार को इसमें कोई दखल नहीं देना चाहिए कि महिला और पुरुष आपस में दूरी घटाना चाहते हैं या बढ़ाना चाहते हैं।
लेकिन यह नालायक राजनीतिक व्यवस्था एक तरफ महिला और पुरुष के बीच दूरी घटाने की बात करती है, सह-शिक्षा की बात करती है, संसद में महिलाओं को विशेष अधिकार दिए जाते हैं; दूसरी तरफ बार-बालाओं को रोका जाता है, वेश्यालयों पर प्रतिबंध लगाए जाते हैं।
सरकार की नीयत खराब है और हम इसका एकमात्र समाधान चाहते हैं कि महिला और पुरुष के बीच कानून में कोई भेद न हो। महिला और पुरुष अपनी दूरी बढ़ाना चाहते हैं या घटाना चाहते हैं, यह निर्णय परिवार कर सकता है या वे स्वयं कर सकते हैं, सरकार नहीं।
हम नई व्यवस्था में सरकार को इस कार्य से बिल्कुल अलग कर देंगे। समाज भी महिला-पुरुष के व्यक्तिगत संबंधों के मामले में विशेष परिस्थिति होने पर ही दखल देगा, अन्यथा इसे सिर्फ पारिवारिक मामला माना जाएगा।
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