नई समाज व्यवस्था में स्वतंत्र व्यापार और अर्थपालिका की अवधारणा
6 जून प्रातःकालीन सत्र।
हम नई समाज व्यवस्था में व्यापार को पूरी तरह स्वतंत्र कर देंगे। व्यापार पर सरकार का किसी प्रकार का कोई नियंत्रण नहीं रहेगा। व्यापार संघ स्वयं व्यापार पर नियंत्रण कर सकते हैं, क्योंकि व्यापार करना सरकार का काम नहीं है।
हम यह बदलाव भी करेंगे कि वर्तमान समय में लोकतंत्र के जो तीन स्तंभ हैं—न्यायपालिका, विधायिका और कार्यपालिका—उसी के साथ एक चौथा स्तंभ अर्थपालिका भी बनाया जाएगा, जिसका संवैधानिक ढांचा होगा।
अर्थपालिका ही बजट बनाएगी। अर्थपालिका ही टैक्स की दर तय कर सकेगी। अर्थपालिका खर्चों पर नियंत्रण करेगी। अर्थपालिका को संवैधानिक मान्यता होगी। इस तरह सरकार या संसद मनमाना टैक्स नहीं लगा सकेगी और मनमाना खर्च भी नहीं कर सकेगी।
मीडिया, शिक्षा और स्वास्थ्य को भी व्यापार के अंतर्गत ही लाया जाएगा। सरकार यदि गरीबों के लिए चाहेगी, तो अपने शिक्षा, स्वास्थ्य या अन्य व्यापारिक संस्थान स्वतंत्र रूप से बना सकती है, किंतु दोनों संस्थान एक-दूसरे में हस्तक्षेप नहीं कर सकेंगे।
मीडिया को कोई विशेष अधिकार नहीं दिया जाएगा। इस तरह हम नई समाज व्यवस्था में सरकार का हस्तक्षेप कम करेंगे।
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