भारतीय मुसलमानों के लिए एक वैकल्पिक सुझाव
यह सही है कि भारत में मुसलमानों के विशेष अधिकार लगातार कम किए जा रहे हैं। अभी असम में एक नया कानून बना है, जिसके अनुसार 18 वर्षों से अधिक उम्र के बच्चों का आधार कार्ड नहीं बन सकेगा, क्योंकि सरकार का मानना है कि सारे आधार कार्ड बन चुके हैं और अब आधार कार्डों का दुरुपयोग हो सकता है तथा यह दुरुपयोग मुसलमान ही कर सकते हैं।
इसी तरह एक नई चर्चा भी शुरू हो गई है कि भारत में मुसलमानों को हिंदुओं की जमीन खरीदने पर प्रतिबंध लगा दिया जाए और यह प्रतिबंध असम से शुरू किया जाए। यदि मुसलमानों को हिंदुओं की जमीन खरीदने पर रोक लग गई, तो यह एक बहुत बड़ा कदम होगा, जिसका प्रभाव मुसलमानों की आबादी और उनके मनोबल पर बहुत पड़ेगा। क्योंकि मुसलमानों की जमीन हिंदू या ईसाई तो खरीद सकते हैं, लेकिन मुसलमान हिंदुओं की जमीन नहीं खरीद सकते। उन्हें सिर्फ मुसलमानों से ही जमीन खरीदने की स्वतंत्रता हो।
इस तरह मैं यह देख रहा हूं कि एक तरफ तो मुसलमान अपने विशेष अधिकार बढ़ाने की लड़ाई लड़ रहा है, दूसरी तरफ उसके समान अधिकारों में भी धीरे-धीरे सेंध लगाने की तैयारी हो रही है। मेरी भारत के मुसलमानों को सलाह है कि वे प्याज और थप्पड़ दोनों खाने की अपेक्षा एक के साथ सहमत हो जाएं, अर्थात समान नागरिक संहिता के लिए तैयार हो जाएं, शरीयत की जगह भारतीय संविधान को सर्वोच्च मान लें। सारा झगड़ा अपने आप निपट जाएगा, अन्यथा धीरे-धीरे मुसलमानों के समान अधिकारों में भी कटौती हो सकती है।
मैंने कल एक लेख लिखा था, जिसके अनुसार वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों में हम हिंदुओं को हिंसक नहीं होना चाहिए। अनेक लोगों ने अपने विचार दिए और अधिकांश ने मेरे कथन से असहमति व्यक्त की। वे लोग ऐसा समझते हैं कि अब वर्तमान वातावरण में हिंदुओं को हिंसा का सहारा लेना चाहिए, लेकिन मैं उनसे आज भी सहमत नहीं हूं।
हम वर्तमान वातावरण में तीन काम कर सकते हैं। पहला, हम कट्टरपंथी मुसलमानों का बहिष्कार कर सकते हैं। दूसरा, हम सरकार को और मजबूत कर सकते हैं। तीसरा, हम सरकार से कानून में बदलाव की मांग कर सकते हैं। ये तीन तरीके पर्याप्त हैं।
वर्तमान समय में हमें गलत कानूनों को बदलने की मांग करनी चाहिए। हम किसी भी परिस्थिति में कानून नहीं तोड़ेंगे। हम गलत कानून को बदलने की मांग करेंगे। मुझे यह अच्छी तरह पता है कि जो लोग हिंसा के समर्थक हैं, वे कभी हिंसा नहीं करते। वे चाहते हैं कि दूसरे लोग हिंसा करें और वे केवल बाहर से प्रोत्साहित करें। मैं इस प्रकार के चालाक लोगों के साथ नहीं हूं।
मुझे यह बात भी अच्छी तरह पता है कि जो लोग हिंसा के समर्थक हैं, वे अपने शहर या गांव के गुंडों के सामने हमेशा नतमस्तक रहते हैं। इसलिए मैं अपने सभी हिंदू भाइयों से यह निवेदन करूंगा कि वे किसी भी परिस्थिति में कानून तोड़ने का समर्थन न करें, क्योंकि ऐसा करने पर सरकार को भी दिक्कत आती है।
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