नेहरू और मोदी मॉडल: बलरामपुर की दृष्टि से एक तुलना
भारत में लंबे समय से यह बहस चल रही है कि नेहरू के कार्यकाल में देश में संतुलित विकास हुआ या नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में। इस बहस में बार-बार दोनों ही तरह की बातें आती रहती हैं। मैं छत्तीसगढ़ के एक आदिवासी जिले बलरामपुर में रहता हूँ। हमारे बलरामपुर जिले में स्वतंत्रता से पहले ट्रेन लाइन का कार्य शुरू हुआ था। अंग्रेजों ने यह कार्य शुरू किया था। उस कार्य में कुछ दूर तक रेलवे स्टेशन भी बना दिए गए थे, जमीन का अधिग्रहण भी हुआ था, मिट्टी भी भरी गई थी। सबसे बड़ी नदी कनहर में पुल भी बन रहा था। एकाएक उस कार्य को नेहरू कालखंड में धन के अभाव में रोक दिया गया।
अब 70 वर्षों के बाद नरेंद्र मोदी सरकार ने कल उस रेल लाइन को स्वीकृति दी है। अब आप सोच लीजिए कि नेहरू के कार्यकाल में संतुलित विकास हो रहा था अथवा नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में। हमें खुशी है कि हमारे पिछड़े जिले को पहली बार रेल कनेक्टिविटी से जोड़ा जाएगा और इसका श्रेय नरेंद्र मोदी सरकार को जाता है, जबकि उस रेल लाइन को बंद करने का श्रेय नेहरू परिवार को जाता है।
आप पूरे भारत में ऐसा उदाहरण खोजकर निकालिए, जहाँ पिछली सरकारों के कार्यकाल में पिछड़े हुए आदिवासी क्षेत्रों में कोई योजना चल रही हो और नरेंद्र मोदी सरकार ने उस योजना को रोक दिया हो। मैं यह निश्चित रूप से कह सकता हूँ कि नेहरू परिवार की तुलना में नरेंद्र मोदी सरकार में संतुलित विकास हो रहा है।
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