नई समाज व्यवस्था में आत्महत्या को स्वाभाविक प्रक्रिया माना जाए

1 सितंबर प्रातःकालीन सत्र।

हम देश में बढ़ती आत्महत्याओं से चिंतित हैं। आत्महत्याओं के बढ़ने का कारण क्या है, उस पर भी हम लगातार सोच रहे हैं। एक कारण तो यह है कि लोगों की अपेक्षाएँ बढ़ रही हैं और उन बढ़ती हुई अपेक्षाओं की पूर्ति नहीं होने के कारण आत्महत्याएँ बढ़ रही हैं, लेकिन यह कारण उतना बड़ा नहीं है, जितना बड़ा कारण सरकारी कानून का है। आत्महत्याओं को जितना अधिक हाईलाइट किया जा रहा है, वह आत्महत्याओं के बढ़ने में एक कारण है। आत्महत्या करना किसी भी तरह से न तो अपराध होना चाहिए और न आत्महत्या को प्रोत्साहित करना अपराध होना चाहिए। आत्महत्याओं के कारण जिस तरह लोगों को परेशान होना पड़ता है, वह सब आत्महत्याओं के बढ़ने का महत्वपूर्ण कारण बन रहे हैं। आत्महत्याओं को मीडिया में भी बहुत ज्यादा कवरेज मिलती है। मेरे विचार से आत्महत्याओं को सूचना के तरह ही मीडिया में जाना चाहिए, न कि उसे एक महत्वपूर्ण समस्या के रूप में। अब सर्वोच्च न्यायालय भी आत्महत्या पर चिंता कर रहा है, जबकि यह सर्वोच्च न्यायालय का भी काम नहीं है। मेरा यह मत है कि नई समाज व्यवस्था में आत्महत्याओं को एक स्वाभाविक प्रक्रिया मानकर उनको नेगलेक्ट किया जाएगा। किसी भी रूप में हम उसको हाईलाइट नहीं करेंगे।