अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और राहुल गांधी के बीच एक विचित्र समानता दिखाई देती है।

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और राहुल गांधी के बीच एक विचित्र समानता दिखाई देती है। दोनों ही एक शक्तिशाली राजनीतिक व्यवस्था की विरासत से जुड़े हुए हैं। ट्रंप अमेरिका के राष्ट्रपति हैं, और राहुल गांधी नेहरू परिवार के एकमात्र राजनीतिक वारिस माने जाते हैं।

लेकिन इन दोनों में एक समान कमजोरी भी है—दोनों ही अक्सर बचकानी बातें करते हैं, किसी विषय पर गंभीरता नहीं दिखाते, बिना सोचे-समझे बयान दे देते हैं और समय आने पर अपने ही शब्दों से पलट जाते हैं। उनके विचारों और व्यवहार में कोई स्थिरता नहीं दिखाई देती।

ट्रंप भारत में राहुल गांधी के माध्यम से अपना भविष्य देखने की कोशिश कर रहे हैं, जबकि राहुल गांधी ट्रंप को देखकर अपने राजनीतिक भविष्य को लेकर चिंतित हैं। लेकिन ट्रंप और राहुल गांधी दोनों को यह समझना चाहिए कि भारत की सहनशीलता और आत्मसम्मान उनकी किसी भी योजना को विफल कर सकता है।

अमेरिका ने पहले भी भारत के पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री को धमकाने की कोशिश की थी और उसका परिणाम देख लिया था। आज ट्रंप फिर से धमकियां दे रहे हैं, लेकिन भारत इस बार भी चुपचाप और संयमित तरीके से जवाब दे रहा है।

भारत लाल बहादुर शास्त्री के दिखाए मार्ग पर चलते हुए आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ रहा है। यदि ट्रंप 1000 प्रतिशत टैरिफ भी लगा दें या सारा आयात बंद कर दें, तो भारत कष्ट सह लेगा, लेकिन ट्रंप और राहुल गांधी—इन दोनों की मिली-जुली गुलामी कभी स्वीकार नहीं करेगा।

इसलिए ट्रंप और राहुल गांधी दोनों को यह समझना चाहिए कि इतने जिम्मेदार पदों पर गंभीर, स्थिर और विवेकशील व्यक्तियों की आवश्यकता होती है। दुर्भाग्य से इन दोनों में वह गंभीरता दिखाई नहीं देती।