नई समाज व्यवस्था में परिवार: प्रथम और सर्वोच्च इकाई
15 जून प्रातःकालीन सत्र
नई समाज व्यवस्था में समाज व्यवस्था की पहली इकाई परिवार मानी जाएगी।
परिवार का ढांचा इस प्रकार होगा कि उसका एक संविधान होगा और वह संविधान ग्राम सभा के पास रजिस्टर्ड होगा। उस संविधान के अनुसार ही वह परिवार कार्य करेगा। संविधान परिवार के लोग मिलकर बनाएंगे।
दूसरी बात यह है कि परिवार में प्रत्येक व्यक्ति का संपूर्ण समर्पण होगा। परिवार में रहते हुए किसी भी सदस्य के कोई मौलिक अधिकार नहीं होंगे। संवैधानिक अधिकार भी उतने ही होंगे, जितने संविधान देगा। स्पष्ट है कि परिवार के प्रत्येक सदस्य के पास केवल कर्तव्य होंगे, कोई अधिकार नहीं होगा।
परिवार का जो कुछ भी होगा, सब जॉइंट होगा। सबका सामूहिक अधिकार होगा, व्यक्तिगत अधिकार नहीं। कोई भी सदस्य कभी भी परिवार छोड़ सकता है या उसे निकाला जा सकता है।
इस तरह नई समाज व्यवस्था में परिवार एक टीम के आधार पर कार्य करेगा, जिसमें उसके सारे आर्थिक, सामाजिक, धार्मिक, राजनीतिक अथवा किसी भी प्रकार के अधिकार संयुक्त होंगे। किसी का व्यक्तिगत कुछ नहीं होगा। इस तरह परिवार में शामिल होते ही उसके सारे अधिकार संयुक्त हो जाएंगे।
इस तरह परिवार व्यवस्था के नाम से व्यक्तिगत स्वतंत्रता को संयुक्त करना प्रत्येक व्यक्ति के लिए अनिवार्य बना दिया जाएगा। व्यक्तिगत संपत्ति और व्यक्तिगत स्वतंत्रता पर कोई-न-कोई नियंत्रण होना ही चाहिए और यह नियंत्रण उस व्यक्ति की सहमति से ही होगा तथा वह सहमति उसके लिए अनिवार्य होगी।
इस तरह परिवार का संविधान सर्वस्वीकृति से बनेगा। परिवार का संविधान बनाने में बहुमत नहीं चलेगा।
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