लोकस्वराज में न्याय और व्यवस्था का संतुलन
लोकतंत्र और तानाशाही में एक बहुत बड़ा फर्क यह होता है कि तानाशाही में व्यवस्था बहुत मजबूत होती है और न्याय कमज...
लोकतंत्र और तानाशाही में एक बहुत बड़ा फर्क यह होता है कि तानाशाही में व्यवस्था बहुत मजबूत होती है और न्याय कमज...
20 जुलाई प्रातःकालीन सत्र वर्तमान दुनिया में जिस प्रकार लोकतंत्र अनेक स्थानों पर अनियंत्रित होकर अराजकता उत्प...
मेरा राहुल गांधी के बारे में अब तक यह विचार बना है कि राहुल गांधी झूठ नहीं बोलते हैं और उन्हें जो बोलने की सला...
कल संवैधानिक आपातकाल की बरसी मनाकर आपातकाल को याद किया गया। मैं भी उसका भुक्तभोगी रहा हूं और मैं भी उस आपातकाल...
17 जून प्रातःकालीन सत्र। वर्तमान दुनिया में अनेक परिभाषाएँ बदल दी गई हैं। इसी तरह स्वराज शब्द की परिभाषा भी ब...
18 जनवरी, प्रातःकालीन सत्रहम निरंतर एक नई राजनीतिक व्यवस्था का प्रारूप तैयार कर रहे हैं। जिस लोक-स्वराज प्रणाल...
हम पिछले चार दिनों से समाज को तोड़ने वाले विषयों—महिला सशक्तिकरण, युवा सशक्तिकरण, क्षेत्रीयता और धार्मिक...
वर्तमान समय में जो नई राज्य-व्यवस्था हमें दिखाई दे रही है, वह केवल भारत में ही गड़बड़ है—ऐसा नहीं है। वा...
10 नवंबर प्रातः कालीन सत्र स्वतंत्रता के पहले भारत में दो विचारधाराए थी एक गांधी विचारधारा दूसरी नेहरू विचारधा...
3 नवंबर — प्रातःकालीन सत्र वर्तमान समय में विश्व यह समझने लगा है कि लोकतंत्र यद्यपि तानाशाही का एक विकल...
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