तेलंगाना के एक ज़िले के कुछ गाँवों के सरपंचों ने मिलकर आवारा कुत्तों को ज़हर देकर मारने का अभियान शुरू किया।

तेलंगाना के एक ज़िले के कुछ गाँवों के सरपंचों ने मिलकर आवारा कुत्तों को ज़हर देकर मारने का अभियान शुरू किया। अब तक लगभग 1200 कुत्ते इस अभियान में मारे जा चुके हैं। जिन लोगों ने यह कार्य किया, वे बधाई के पात्र हैं, क्योंकि वर्तमान समय में संवैधानिक व्यवस्था जिस स्तर तक अराजक हो चुकी है, उसे ठीक करने के लिए उसी अराजक तरीके का सहारा लेना पड़ रहा है।
मानवाधिकार के नाम पर नाटक करने वाले अनेक लोग, मेनका गांधी और अन्य कथित नैतिक पहरेदार इस पूरे प्रकरण में कहीं नेपथ्य में चले गए हैं।
मैं स्वयं अपने जीवनकाल में दो बार नगर पालिका अध्यक्ष रहा हूँ और उस दौरान मैंने भी कई बार संवैधानिक व्यवस्था को संवैधानिक तरीकों से ही किनारे कर, सामाजिक स्तर पर एक नई व्यवस्था स्थापित की थी।
पंजाब में भी एक समय इसी प्रकार शांति स्थापित की गई थी। नक्सलवाद को समाप्त करने में भी परंपरागत तरीकों से हटकर उपाय अपनाए गए। असम में भी इसी प्रकार की रणनीति का सहारा लिया गया था। योगी आदित्यनाथ ने भी उत्तर प्रदेश में इसी प्रकार के कठोर उपायों के माध्यम से शांति और कानून-व्यवस्था स्थापित की।
दुनिया जानती है कि नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने की पृष्ठभूमि में गोधरा दंगों की बड़ी भूमिका रही है, जहाँ उन्होंने संवैधानिक ढाँचे के भीतर रहते हुए भी संविधान से हटकर न्याय का पक्ष लिया।
इसलिए मेरा मानना है कि भविष्य में दोबारा ऐसी परिस्थितियाँ उत्पन्न न हों, इसके लिए आवश्यक है कि वर्तमान संवैधानिक व्यवस्था अपनी कमज़ोरियों को दूर करे।
हमें ऐसी स्थिति में न पहुँचना पड़े कि कानूनी रास्ते बंद हो जाएँ और हमें आवारा पशु आतंकवाद या अन्य अराजक समस्याओं से निपटने के लिए कानून अपने हाथ में लेने की मजबूरी उत्पन्न हो।