हमारी संपूर्ण समाज व्यवस्था का सबसे महत्वपूर्ण आधार हमारी परिवार व्यवस्था है।
8 फरवरी प्रातःकालीन सत्र
हमारी संपूर्ण समाज व्यवस्था का सबसे महत्वपूर्ण आधार हमारी परिवार व्यवस्था है। परिवार व्यवस्था के ऊपर ही पूरा सामाजिक ढाँचा खड़ा होता है।
मैंने कल लिखा था कि साम्यवादी विचारधारा उस छिपकली के समान है, जिसके शरीर के हर अंश में घातक विष भरा होता है। यह स्पष्ट है कि दुनिया में साम्यवादी विचारधारा ही वह विचारधारा है जो परिवार व्यवस्था पर सबसे गहरी चोट करती है।
महिला और पुरुष के बीच टकराव पैदा करने में साम्यवादी विचारधारा की भूमिका सबसे अधिक रही है। उसी प्रकार युवा और वृद्ध के बीच संघर्ष उत्पन्न करने में भी साम्यवादी ही सबसे आगे दिखाई देते हैं। आज यदि दुनिया में “युवा सशक्तिकरण” का नारा देने में साम्यवादी सबसे आगे हैं, तो इसके दुष्परिणामों की जिम्मेदारी भी साम्यवादियों पर ही जाती है।
पश्चिमी जगत तो एक बे-पेंदी का लोटा है—वह साम्यवादी विचारधाराओं के साथ आसानी से घुल-मिल जाता है और इसी कारण वह भी “जैन जी” का नारा लगाने लगता है। लेकिन यह “जैन जी” आखिर है क्या?
हमारी आदर्श परिवार व्यवस्था में युवा और वृद्ध की एक संयुक्त भूमिका होती है। जैसे ही युवा सक्षम होता है, वृद्ध धीरे-धीरे अपनी जिम्मेदारियाँ उसे सौंपते हैं, और युवा सक्रिय रहते हुए भी सदैव वृद्धों की सलाह और अनुभव का सम्मान करता है। इसके विपरीत, कम्युनिस्ट विचारधारा युवा और वृद्ध को आपस में लड़ाकर परिवार व्यवस्था को तोड़ना चाहती है।
इसीलिए हमें साम्यवादियों से दूरी बनानी चाहिए और अपनी परिवार व्यवस्था को मजबूत करना चाहिए।
जो वृद्ध सक्षम युवाओं को जिम्मेदारी नहीं दे रहे हैं, वे भी गलत हैं।
और जो युवा जल्दबाजी में अपने वृद्धों को किनारे कर रहे हैं, वे भी उतने ही गलत हैं।
हमें युवा और वृद्ध के टकराव से पूरी तरह बचना होगा।
“जैन जी” का नारा पूरी तरह घातक है।
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