भारतीय राजनीति में सत्ता, संस्थाएँ और आरोप: कांग्रेस से भाजपा तक एक विश्लेषण
कांग्रेस पार्टी ने लगभग 60 वर्षों तक भारत पर एकछत्र शासन किया। कांग्रेस पार्टी की कुछ प्रमुख विशेषताएँ रही हैं। पहली, वह धर्मनिरपेक्षता का प्रचार करती थी, परंतु उस पर मुस्लिम तुष्टिकरण की ओर झुकाव का आरोप भी लगता रहा। दूसरी, यह कहा जाता है कि कांग्रेस पार्टी ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) और केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) जैसी संस्थाओं का दुरुपयोग किया, और इसी कारण इन संस्थाओं को व्यापक शक्तियाँ भी प्रदान की गईं। तीसरी, उस पर भ्रष्टाचार के आरोप भी लगते रहे, जिनके माध्यम से राजनीतिक उद्देश्यों की पूर्ति की बात कही जाती है। चौथी, कांग्रेस सरकार ने अनेक कानून बनाए, जिनके बारे में आलोचकों का मत है कि इससे समाज पर नियंत्रण बढ़ा। पाँचवीं, उस पर चुनाव आयोग, राष्ट्रपति, सर्वोच्च न्यायालय और संसदीय प्रक्रियाओं के दुरुपयोग के आरोप भी लगाए गए।
वर्तमान भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार के संदर्भ में भी कुछ समान आरोप लगाए जाते हैं। आलोचकों का कहना है कि भाजपा हिंदू हितों के पक्ष में अधिक स्पष्ट रूप से खड़ी दिखाई देती है। साथ ही, उस पर भी भ्रष्टाचार, संस्थाओं के दुरुपयोग, और अधिक कानून बनाकर शासन को मजबूत करने के आरोप लगाए जाते हैं। यह भी कहा जाता है कि भाजपा सरकार प्रवर्तन निदेशालय और केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो का उपयोग राजनीतिक विरोधियों के खिलाफ उसी तरह कर रही है, जैसा आरोप पूर्ववर्ती सरकारों पर लगता रहा है।
इस प्रकार, यह धारणा उभरती है कि पूर्व सरकारों द्वारा बनाए गए कानून और व्यवस्थाएँ आज भी राजनीतिक संघर्ष में उपयोग हो रही हैं। जिन नीतियों का उपयोग पहले विपक्ष के खिलाफ किया गया, आज उन्हीं का उपयोग वर्तमान सरकार द्वारा अपने विरोधियों के विरुद्ध किया जा रहा है।
स्पष्ट है कि किसी भी सरकार की वास्तविक परीक्षा तब होती है, जब उसके सामने मजबूत विपक्ष न हो और उसे स्वतंत्र रूप से शासन करने का अवसर मिले। ऐसे समय में ही यह देखा जा सकता है कि वह सत्ता का उपयोग किस प्रकार करती है। हम उस समय की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
Comments