नरेंद्र मोदी सरकार की उपलब्धियाँ: कश्मीर और नक्सलवाद समाधान
31 मार्च प्रातःकालीन सत्र। नरेंद्र मोदी के पहले की सरकारों के यदि पूरे कार्यकाल की समीक्षा की जाए, तो कुछ गंभीर समस्याएँ उनके कार्यकाल के लिए कलंक मानी जा सकती हैं, जो नरेंद्र मोदी–मोहन भागवत की सरकार को विरासत के रूप में मिलीं। इन समस्याओं में से सिर्फ दो गंभीर समस्याओं को सुलझाने में इस सरकार को सफलता मिल पाई है—पहली कश्मीर समस्या, जिसे इस सरकार ने सफलतापूर्वक सुलझा लिया, और दूसरी नक्सलवाद। आज भारत नक्सली-मुक्त हो रहा है।
इस समस्या का जन्म नेहरू परिवार के शासनकाल में हुआ। इस शासनकाल में यह समस्या लगातार फलती-फूलती गई। मैं इस पूरी समस्या के उत्थान-पतन का प्रत्यक्ष गवाह रहा हूँ और मेरी भी इस पूरे कार्य में एक सक्रिय भूमिका रही है। मैं जानता हूँ कि इस समस्या को उलझाने और सुलझाने में भारत के गांधीवादियों की भी बहुत बड़ी भूमिका रही है।
यह भी एक सच्चाई है कि मनमोहन सिंह और तत्कालीन गृह मंत्री पी. चिदंबरम इस समस्या को सुलझाना चाहते थे, लेकिन दिग्विजय सिंह इस समस्या का लाभ उठाना चाहते थे, और दिग्विजय सिंह को राहुल गांधी का समर्थन मिलने के कारण यह समस्या उस समय नहीं सुलझ सकी। अब इस समस्या को सुलझाने का श्रेय नरेंद्र मोदी, अमित शाह और मोहन भागवत को जाता है, क्योंकि वर्तमान सरकार में दिग्विजय सिंह सरीखा कोई ऐसा व्यक्ति नहीं है, जो इस नक्सलवाद का लाभ उठाना चाहता हो।
अब कोई ऐसे गांधीवादी भी नहीं बचे हैं, जो इस समस्या को सुलझाने या उलझाने में सक्रिय भूमिका निभा रहे हों। यही कारण है कि आज भारत इस बात पर गर्व कर रहा है कि हमने भारत को नक्सली-मुक्त बना दिया है। सच बात है, इस कार्य के लिए सरकार बधाई की पात्र है।
जिस तरह नरेंद्र मोदी सरकार ने इन दो “कैंसरों” का समाधान किया है, उसी तरह अब समान नागरिक संहिता का कानून लाकर जातिवाद और सांप्रदायिकता पर भी सरकार को समाधान की शुरुआत करनी चाहिए।
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