कश्मीर और नक्सलवाद: समाप्त होती चुनौतियों की कहानी

जिस तरह 5 वर्ष पहले कश्मीर से आतंकवाद का सफाया हुआ था, इसी तरह आज से भारत से नक्सलवाद का भी सफाया हो चुका है। अब भविष्य में हमारे बच्चे किताबों में पढ़कर यह आश्चर्य करेंगे कि कश्मीर में कभी पत्थर भी चलते थे, कश्मीर कभी पाकिस्तान में जाने की उम्मीद रखता था, और नक्सलवाद कभी भारत में हिंसा की ताकत पर माओवाद लाने का सपना देख रहा था। इन दोनों सपनों को कुचलने का काम किसी नरेंद्र मोदी की सरकार ने किया था।

भविष्य में बच्चे नरेंद्र मोदी को भगवान भी मान सकते हैं। आज के बाद अब राहुल गांधी को एक नया काम मिल गया है। अब जब भी बस्तर में कोई आतंकवादी घटना होगी, तो राहुल गांधी उछल-उछलकर कहेंगे कि देखो, नक्सलवाद समाप्त करने का ढिंढोरा पीटा जा रहा था। कश्मीर में आज भी राहुल गांधी कहते रहते हैं कि अभी कश्मीरी पंडितों का पुनर्वास नहीं हुआ है।

अभी राहुल गांधी केरल चुनाव में व्यस्त हैं। चुनाव खत्म होते ही वे जरूर यह हल्ला करेंगे कि नक्सलवाद खत्म नहीं हुआ है, सरकार झूठ बोल रही है। लेकिन सच्चाई यह है कि अब नक्सलवाद और कश्मीर की स्वतंत्रता इतिहास की कहानी बन चुकी है।

अब ऐसा कोई संदेह नहीं है कि भविष्य में कोई कश्मीर पर आँख उठा सकेगा या कोई आतंकवाद के बल पर भारत में सरकार बदलने का सपना देख सकेगा, क्योंकि अब भारत में कांग्रेस की सरकार नहीं है।