बल प्रयोग की परिभाषा, सीमाएँ और सामाजिक उत्तरदायित्व

23 अप्रैल प्रातः कालीन सत्र। नई राजनीतिक व्यवस्था में हम किसी भी प्रकार की हिंसा को गंभीर अपराध मानेंगे। यदि जनहित में कोई हिंसा है, तब भी हम उसे साधारण अपराध मानेंगे, लेकिन किसी भी परिस्थिति में हम हिंसा की अनुमति नहीं देंगे। यदि जानबूझकर कोई हिंसा की गई है, तब उसे हम बहुत गंभीर अपराध मानेंगे। समाज में किसी को भी बल प्रयोग करने का अधिकार नहीं होगा। बल प्रयोग सिर्फ राज्य या राज्य द्वारा अनुमति प्राप्त व्यक्ति ही कर सकते हैं। राज्य द्वारा अधिकतम बल प्रयोग किया जा सकता है और समाज द्वारा न्यूनतम बल प्रयोग भी नहीं किया जा सकता। यदि आपसी सहमति के आधार पर किसी प्रकार का कोई बल प्रयोग किया जाता है, तो उसमें सरकार का कोई हस्तक्षेप नहीं होगा, क्योंकि बिना सहमति के किया गया बल प्रयोग ही अपराध होता है। पति-पत्नी के बीच यदि बलपूर्वक कोई संबंध बनाए जाते हैं, तो उसे अपराध तब तक नहीं माना जाएगा, जब तक वह संबंध टूट नहीं जाता। यदि किसी बल प्रयोग में स्थानीय इकाइयाँ निपटा देती हैं, तब सरकार उसमें कोई हस्तक्षेप नहीं करेगी, जब तक कोई व्यक्ति अथवा परिवार अथवा संबंधित ग्राम सभा सरकार के पास कोई अपील नहीं करती। हम पूरे समाज को बल प्रयोग से मुक्त होने की गारंटी देंगे।