पाकिस्तान के बयान और भारत की आंतरिक राजनीति: उभरते सवाल
पाकिस्तान और चीन ने मिलकर अभी ईरान-अमेरिका के बीच युद्धविराम कराया है। युद्धविराम की सफलता से उत्साहित होकर पाकिस्तान कुछ बड़ी-बड़ी बातें बोलना शुरू कर दिया है। कल पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने यह कहकर सनसनी फैला दी कि इज़राइल और भारत दुनिया के मुसलमानों के सबसे बड़े दुश्मन हैं। उन्होंने कहा कि दुनिया भर के मुसलमानों को एकजुट होकर इस खतरे का मुकाबला करना चाहिए।
जिस तरह पाकिस्तान के मंत्री ने भारत और इज़राइल को एक साथ दिखाकर इन्हें मुसलमानों का दुश्मन सिद्ध करने की कोशिश की है, ठीक वैसी ही भाषा भारत के कुछ विपक्षी नेता भी बोल रहे हैं। हमारे भारत के विपक्षी नेता भी इज़राइल और भारत सरकार की इस बात के लिए लगातार आलोचना करते रहते हैं कि इज़राइल और भारत की सरकार मुसलमानों की दुश्मन है।
पाकिस्तान सरकार और भारत के विपक्ष की भाषा एक जैसी हो गई है—यह बहुत आश्चर्यजनक है। भारत का यदि कोई मुसलमान इस प्रकार की बात करता है तो वह एक अलग विषय हो सकता है, क्योंकि वह भावनात्मक दृष्टि से सोच सकता है, लेकिन यदि भारत के विपक्ष के नेता पाकिस्तान के साथ खड़े दिखाई दें, तो यह एक गंभीर विषय बन जाता है।
मैं यह भी देख रहा हूँ कि भारत के अनेक विपक्षी नेता खुलकर पाकिस्तान की इस बात के लिए प्रशंसा कर रहे हैं कि पाकिस्तान ने युद्धविराम कराया, और भारत सरकार इसमें असफल रही—इस आधार पर वे भारत सरकार की आलोचना कर रहे हैं।
अब हमारे लिए यह सोचने का समय आ गया है कि भारत के विपक्षी नेता क्या वास्तव में भारत-विरोधी हैं, या वे केवल सरकार की नीतियों के विरोध में अपनी भूमिका निभा रहे हैं।
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