गांधीवाद और सर्वोदय: अवधारणा, उत्पत्ति और मूलभूत अंतर

पूरे समाज में एक भ्रम फैला हुआ है कि गांधीवादी और सर्वोदय एक ही होते हैं, लेकिन मेरा अपना अनुभव है कि गांधीवाद और सर्वोदय में जमीन-आसमान का फर्क है। सर्वोदय का जन्म ही गांधी की हत्या के बाद पंडित नेहरू ने सेवाग्राम में बैठकर किया था।

गांधीवादी कभी नक्सलवाद या मुस्लिम आतंकवाद का समर्थन कर ही नहीं सकते, क्योंकि गांधीवादी अहिंसक होते हैं, कायर नहीं। सर्वोदय लोग कायर होते हैं, संघर्ष नहीं कर सकते। गांधीवादी सत्य के पीछे चलते हैं और सर्वोदय कम्युनिस्टों के पीछे चलते हैं।

गांधीवादी कभी सत्ता का मोह नहीं करते, संपत्ति के लिए नहीं लड़ते। सर्वोदय सिर्फ सत्ता और संपत्ति के लिए ही लड़ते हैं, बाकी कोई काम नहीं करते। गांधीवादी गांधी विचारों को महत्वपूर्ण मानते हैं, सर्वोदय विनोबा के विचारों को महत्वपूर्ण मानते हैं, और दुनिया जानती है कि विनोबा सब कुछ जानते हुए भी नेहरू के प्रति बहुत वफादार थे।

वर्तमान भारत में गांधीवादियों की संख्या बहुत तेजी से बढ़ रही है, क्योंकि नरेंद्र मोदी और मोहन भागवत गांधी की लाइन पर चल रहे हैं, लेकिन सर्वोदय लोगों की संख्या गिनी-चुनी बची है, जो संपत्ति और सत्ता के लिए लड़ते हैं। हम सब लोग गांधी को मानने वाले हैं, सर्वोदयी नहीं हैं।