संगठन नहीं, संस्थाएं: टकराव मुक्त समाज के लिए नई संरचना
4 मई प्रातःकालीन सत्र। हम नई व्यवस्था में प्रत्येक व्यक्ति को एक कोड नंबर देंगे और वही कोड नंबर उसकी पहचान होगा। व्यक्तिगत आधार पर या सामाजिक आधार पर वह अपना कोई भी नाम रख सकता है, उसका कोई भी धर्म हो सकता है, लेकिन सरकारी आधार पर नाम के आधार पर कोई भेदभाव नहीं होगा। दूसरी बात यह है कि हम किसी भी प्रकार का संगठन बनाने की स्वतंत्रता नहीं देंगे। आप संस्था बना सकते हैं, हम संस्थाओं को मान्यता देंगे। आप सरकार को सलाह दे सकते हैं, लेकिन संगठन के आधार पर मांग नहीं कर सकते। संगठन तो सिर्फ परिवार, गांव, जिला, प्रदेश और केंद्र के आधार पर ही बनाए जा सकते हैं। इस तरह हम पूरी व्यवस्था करेंगे कि सांप्रदायिकता के आधार पर समाज में किसी भी प्रकार का कोई टकराव न हो।
हम नई व्यवस्था के अंतर्गत सांप्रदायिकता को पूरी तरह अमान्य कर देंगे। हम इस बात को अच्छी तरह समझते हैं कि दुनिया में धर्म के नाम पर सबसे अधिक हत्याएं हुई हैं और सबसे ज्यादा अपराध भी धर्म के नाम पर हुए हैं, जबकि धर्म को अपराध नियंत्रण में सहायक बताया जाता है। हम इसका कारण भी समझते हैं कि धर्म के आधार पर बनने वाले संगठन ही टकराव का कारण बनते हैं।
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