मोहन भागवत के नेतृत्व में संघ का बढ़ता प्रभाव

यह बात सारी दुनिया जान गई है कि मोहन भागवत के संघ प्रमुख बनने के बाद संघ बहुत तेजी से सशक्त हो रहा है। 5 वर्षों में ही संघ की ताकत इतनी बढ़ी कि भारत में नरेंद्र मोदी की सरकार बन गई। यह संघ की ताकत थी कि नरेंद्र मोदी सारे षड्यंत्रों के बाद भी लगातार भारत में मजबूत होते जा रहे हैं।

मेरे विचार से संघ की इस मजबूती में मोहन भागवत का भी बहुत बड़ा योगदान है। मैं पहले मोहन भागवत को इतना गंभीर विचारक नहीं मानता था, लेकिन पिछले 8–10 वर्षों से मोहन भागवत लगातार गंभीर विचार व्यक्त कर रहे हैं।

अभी एक-दो दिन पहले ही उन्होंने यह बात भी स्पष्ट कर दी कि भारत हिंदू राष्ट्र है। इसका अर्थ यह नहीं है कि भारत की भाषा एक होगी, भारत की पूजा-पद्धति एक होगी, भारत के लोगों की पोशाक एक होगी। भारत हिंदू राष्ट्र है, इसका सीधा अर्थ यह है कि भारत का प्रत्येक व्यक्ति अपने व्यक्तिगत आचरण में स्वतंत्र होगा। हम देश में वैचारिक माध्यम से एकता स्थापित करेंगे, बलपूर्वक या कानून के माध्यम से नहीं।

इतनी गंभीर बात मैंने किसी संघ प्रमुख से नहीं सुनी थी, जो मोहन भागवत जी ने अभी कही है। मैं गंभीरता से यह महसूस करता हूं कि मैं मोहन भागवत को समझने में देर की।

मेरे अपने विचार में वर्तमान दुनिया में मोहन भागवत ही वास्तविक शंकराचार्य हैं। मोहन भागवत में छल-कपट नहीं है, संकीर्णता नहीं है, सांप्रदायिकता नहीं है। वे साफ-साफ बोलते हैं।

सबसे बड़ी बात यह है कि संघ के विस्तार से जो लोग अपने व्यक्तिगत या धार्मिक स्वार्थ की उम्मीद में बैठे हुए थे, उन्हें संघ के इन विचारों से बहुत झटका लगा है। मुझे यह पूरा विश्वास है कि मोहन भागवत हिंदुत्व को और अधिक ऊंचाई तक ले जाने में सफल होंगे।