विकास बनाम पर्यावरण : विपक्ष की स्पष्ट नीति का प्रश्न

कल मैं विपक्ष की चर्चा करते हुए यह प्रश्न पूछ चुका हूँ कि विपक्ष सिर्फ सरकार की आलोचना न करके समाज के सामने अपनी नीतियाँ भी रखे। आज मैं उसी बात को आगे बढ़ाते हुए भारत के विपक्ष से यह जानना चाहता हूँ कि वह विकास और पर्यावरण के संतुलन पर क्या सोचता है।

यह बात साफ दिखाई देती है कि Narendra Modi सरकार विकास को अधिक प्राथमिकता दे रही है और विपक्ष पर्यावरण के नाम पर भारत की विकास यात्रा में रोड़े अटका रहा है। आप गंभीरता से सोचिए कि वर्तमान भारत के लिए विकास अधिक महत्वपूर्ण है या पर्यावरण।

पर्यावरण एक विश्वव्यापी समस्या है और उसका समाधान भी विश्वव्यापी स्तर पर ही किया जा सकता है। हम पर्यावरण की सिर्फ उतनी ही चिंता कर सकते हैं, जिसका बहुत अधिक दुष्प्रभाव हमारी आंतरिक व्यवस्था पर न पड़े। इससे अधिक पर्यावरण की चिंता करना बेवकूफी के अतिरिक्त और कुछ नहीं है। आज Russia और Ukraine, United States और Iran, Israel और Lebanon पर्यावरण के प्रति कितने सतर्क हैं? क्या भारत ने ही इस बात का ठेका ले रखा है कि दुनिया के देश अनावश्यक युद्ध करके पर्यावरण प्रदूषण करें और भारत जंगल लगाकर दुनिया के प्रदूषण का समाधान करे?

इसलिए अब विपक्ष को विकास और पर्यावरण पर अपनी बात साफ-साफ रखनी चाहिए। Himalayas में यदि सड़क बनेगी तो हिमालय को नुकसान होना स्वाभाविक है। विपक्ष को यह बात स्पष्ट करनी चाहिए कि बढ़ती हुई आबादी के आधार पर हमें सड़कों की चिंता करनी चाहिए या पहाड़ों की। इसलिए मैं विपक्ष से यह निवेदन करूँगा कि वह अपनी नीतियाँ स्पष्ट करे।