नरेंद्र मोदी के साथ विकास की सच्चाई पर नई बहस
कल नरेंद्र मोदी ने पहली बार यह बात स्वीकार कर ली है कि दुनिया में विकास का फूलता हुआ गुब्बारा फूट गया है। अब दुनिया में विकास की गति कम हो जाएगी। यह बात तो बहुत लंबे समय से दिख रही थी और मैं तो 70 वर्ष पहले से लगातार इस संबंध में लिखता रहा हूं, लेकिन दुनिया का कोई नेता इस बात को स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं था।
दुनिया में विकास तकनीक के कारण हो रहा था, लेकिन उस विकास को बहुत अधिक गति देने के लिए कृत्रिम ऊर्जा का सहारा लिया गया। डीजल-पेट्रोल को मुख्य आधार बनाया गया। विकास की गति इतनी तेज हुई कि विकास का गुब्बारा फूट गया और उसके दुष्परिणाम दुनिया भर में दिखाई देंगे, क्योंकि यह सिर्फ विकास का प्रश्न नहीं था, यह पर्यावरण का भी प्रश्न था, यह आपसी संघर्ष का भी प्रश्न था।
विकास की यह प्रतिस्पर्धा पूरी दुनिया में नए-नए टकराव को जन्म दे रही थी। यह अवश्य है कि यह गुब्बारा फूटने में कुछ समय लगा और इसकी घोषणा करने में भी समय लगा, लेकिन इसके लिए नरेंद्र मोदी बधाई के पात्र हैं कि उन्होंने सबसे पहले यह सच्चाई स्वीकार कर ली कि दुनिया में विकास की गति का गुब्बारा फूट गया है।
अब भारत को यह सावधानी रखनी चाहिए कि उसका भारत पर कम से कम प्रभाव पड़े। नरेंद्र मोदी ने देश के लोगों को सावधान भी कर दिया है और धीरे-धीरे दुनिया भी इस बात को समझ जाएगी कि डीजल-पेट्रोल का मनमाना उपयोग करके किया गया विकास पूरी दुनिया के लिए घातक होगा।
भारत में तो सच्चाई समझने की शुरुआत हो गई है, दुनिया समझ ले तो अधिक अच्छा है।
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