नरेंद्र मोदी की 'आत्मनिर्भर भारत' और डोनाल्ड ट्रंप की वैश्विक नीति
Donald Trump के वर्तमान नेतृत्व ने पूरी दुनिया की राजनीति में उथल-पुथल मचा दी है। भारत भी इससे बहुत प्रभावित हुआ है। एक वर्ष पहले तक भारत आराम से विकास की गति पर बढ़ रहा था, लेकिन पिछले एक वर्ष में ट्रंप की चुनौती आने के बाद भारत को अपनी नीति में बदलाव करना पड़ा है।
वैसे तो पिछले तीन महीने से यह अनुभव होने लगा था कि Narendra Modi कुछ अलग तरह का सोच रहे हैं, लेकिन बंगाल चुनाव के बाद नरेंद्र मोदी ने यह बात साफ कर दी कि अब भारत विकास की तुलना में आत्मनिर्भरता की दिशा में अधिक आगे बढ़ेगा।
अब तक दुनिया भारत को एक विकासशील देश मानती थी, इसलिए भारत पर किसी की विशेष बुरी नजर नहीं थी। भारत अपनी स्वतंत्रता के बाद से लगातार तेज गति से विकास कर रहा था, लेकिन जब से नरेंद्र मोदी ने बड़ी-बड़ी बातें शुरू कर दीं कि भारत जल्दी ही तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगा, भारत पूरी दुनिया में आगे बढ़ जाएगा, तब से दुनिया की दोनों महाशक्तियों को भारत की दिशा खतरनाक लगने लगी।
यही कारण है कि दुनिया की दोनों महाशक्तियों ने भारत के विषय में कुछ अलग सोचना शुरू कर दिया। ठीक समय पर नरेंद्र मोदी ने अपनी नीति बदलकर यह प्रमाणित कर दिया कि वे जिद्दी नहीं हैं।
मेरे विचार से अब भारत बहुत तेज गति से आत्मनिर्भरता की तरफ बढ़ेगा। अब खपत बढ़ाने का नहीं, बल्कि खपत घटाने का समय आ गया है। उत्पादन और उपभोग के बीच का अंतर कम करने का समय आ गया है। निर्यात और आयात के बीच का अंतर भी कम करने की जरूरत है।
मैं तो लंबे समय से नरेंद्र मोदी को यह सलाह दे रहा था, लेकिन अच्छा हुआ कि उन्होंने देर से ही सही, पर सही कदम उठाया है।
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