वर्तमान परिस्थितियाँ और मुस्लिम समाज का राजनीतिक पुनर्विचार
भारत का हर मुसलमान बच्चा-बच्चा भी इस बात को याद करता है कि हमारे पूर्वजों ने भारत पर कई सौ वर्षों तक शासन चलाया था। हम उन मुसलमानों की संतान हैं जिन्होंने भारत को गुलाम बनाकर रखा था, जिसकी सरकार में हिंदू दूसरे दर्जे के नागरिक थे। आज हम उन्हीं की संतान ऐसी स्थिति में क्यों आ गए हैं कि हमें दूसरे दर्जे का नागरिक बनाने की चर्चाएं होने लगी हैं।
एक तरफ भारत की राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक स्थिति मुसलमान को यह सलाह दे रही है कि आप हिंदुओं के साथ समझौता कर लो, बराबरी का व्यवहार कर लो। हिंदू आपको दूसरे दर्जे का नागरिक बनाकर नहीं रखेगा, बल्कि बराबरी का अधिकार देगा। दूसरी तरफ मुसलमान यह भी देख रहा है कि हम किसी गुलाम के साथ बराबरी का व्यवहार कैसे कर सकते हैं।
एक तरफ भारत का मुसलमान नरेंद्र मोदी और संघ के साथ समझौता भी करना चाहता है, दूसरी तरफ आज भी यह हिम्मत कर रहा है कि हमें एक बार और राहुल गांधी को आजमा लेना चाहिए।
जब भारत का मुसलमान वर्तमान परिस्थितियों का आकलन करता है, तब वह नरेंद्र मोदी के साथ समझौता करना चाहता है। दूसरी ओर, जब वह अपने भूतकाल का सपना देखता है, तब उसे यह याद आता है कि अभी एक बार हम और टकराकर देखें।
इसी उधेड़बुन में भारत का मुसलमान यह तय नहीं कर पा रहा है कि वह नेहरू परिवार के साथ रहे या अब परिस्थितियों के अनुसार अपने को बदल दे।
मेरी भारत के मुसलमानों को सलाह है कि भूतकाल को भूल जाओ, वर्तमान की समीक्षा करो और भविष्य की चिंता करो। राष्ट्रीय मुस्लिम मंच ने तुम्हारे लिए एक अच्छा दरवाजा खोलकर रखा है।
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