नई सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक व्यवस्था की रूपरेखा

7 जून प्रातःकालीन सत्र।

हम दुनिया की नई सामाजिक, राजनीतिक, आर्थिक और धार्मिक व्यवस्था पर चर्चा कर रहे हैं। यह एक तरह का युग-परिवर्तन अभियान है, जिसे हम संपूर्ण व्यवस्था परिवर्तन, समग्र व्यवस्था परिवर्तन, व्यवस्था परिवर्तन अथवा कोई और नाम भी दे सकते हैं। लेकिन यह बात निश्चित है कि दुनिया जिस तरह आगे बढ़ रही है, उसमें किसी न किसी प्रकार का बदलाव आवश्यक है। और वह बदलाव न तो शरीफ लोग कर पाएंगे और न ही धूर्त लोग उसे करने देंगे। ऐसा बदलाव केवल समझदार लोग ही कर सकते हैं।

उस बदलाव की ही रूपरेखा हमारा अभियान है। हम इस अभियान के माध्यम से दुनिया को यह आश्वासन दे रहे हैं कि जो भी व्यक्ति इस अभियान से जुड़ेगा, वह कम से कम इतना समझदार अवश्य हो जाएगा कि वह किसी भी संकट में कभी नहीं फंसेगा। वह अपनी सुरक्षा स्वयं कर सकेगा, क्योंकि उसकी समझदारी बहुत बढ़ जाएगी।

हम शराफत को समझदारी की दिशा में बदलने को ही अपनी सफलता मान रहे हैं। वर्तमान समय में भारत में ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में कोई ऐसा प्रयत्न नहीं हो रहा है जो किसी व्यक्ति को समझदार बनने की दिशा में बढ़ा सके। इसके स्थान पर धूर्त पेशेवर लोग समाज को अधिक से अधिक शराफत की ओर धकेलना चाहते हैं, जो घातक है।

इसलिए हम लोगों ने वर्तमान समय में भारत से यह अभियान शुरू किया है और इसे विश्व स्तर तक ले जाएंगे। यह चर्चा आगे भी जारी रहेगी।