सत्ता परिवर्तन नहीं, व्यवस्था परिवर्तन हमारा लक्ष्य

पाँच राज्यों के चुनाव ने यह सिद्ध कर दिया है कि सत्ता परिवर्तन का कार्य लगभग पूरा हो गया है, लेकिन सत्ता परिवर्तन ही व्यवस्था परिवर्तन नहीं है। हमने पिछले 70 वर्षों में सत्ता तो कई बार बदली, लेकिन राजनीतिक व्यवस्था नहीं बदली। अब सत्ता परिवर्तन हो जाने के बाद हमें व्यवस्था परिवर्तन की दिशा में भी आगे बढ़ना है।

इसका अर्थ स्पष्ट है कि हमें दो दिशाओं से सावधान रहना पड़ेगा। पहली दिशा यह है कि वर्तमान सत्ता कहीं फिर से पुराने सत्ता वालों के हाथ में न चली जाए। हम पूरी ताकत लगाकर वर्तमान सत्ता की सुरक्षा करेंगे, लेकिन हम यह बात लगातार देखते रहेंगे कि यदि कोई नई राजनीतिक चुनौती व्यवस्था परिवर्तन की दिशा में वर्तमान सत्ता से टकराव लेती है, तो हम उस नए टकराव की मदद करेंगे, वर्तमान सत्ता की नहीं।

हम व्यवस्था परिवर्तन के लोग हैं। सत्ता परिवर्तन हमारा लक्ष्य नहीं, बल्कि मार्ग है। हम 70 वर्षों के बाद अपने उद्देश्य में सफल हुए हैं, लेकिन हमारा अंतिम लक्ष्य व्यवस्था परिवर्तन है। अगर अब राहुल गांधी भी व्यवस्था परिवर्तन की दिशा में आगे बढ़ते हैं, तो हम राहुल गांधी का समर्थन करेंगे, नरेंद्र मोदी का नहीं। हम व्यवस्था परिवर्तन के पक्षधर हैं। विपक्ष का कोई भी नेता यदि ईमानदार है और लोक स्वराज की दिशा में आगे बढ़ता है, तो हम उसके साथ हैं।