व्यवस्था परिवर्तन की दिशा में: नई सामाजिक अर्थनीति का प्रस्ताव

12 जून प्रातःकालीन सत्र

मैं यह बात साफ कर देना चाहता हूँ कि हम सत्ता परिवर्तन की योजना पर काम नहीं कर रहे हैं, हम व्यवस्था परिवर्तन की योजना पर कार्य कर रहे हैं।

इस व्यवस्था परिवर्तन में हम अर्थव्यवस्था से भी राज्य व्यवस्था को लगभग मुक्त कर देंगे। हम लोगों की जो अर्थव्यवस्था होगी, उस अर्थव्यवस्था में महंगाई, बेरोजगारी, गरीबी आदि का कोई अस्तित्व नहीं रहेगा। मुद्रा पूरी तरह स्वतंत्र होगी। सरकार की अपनी मुद्रा होगी और बाजार में कोई भी व्यक्ति अपनी मुद्रा चला सकेगा।

हम तत्काल महंगाई खत्म करने के लिए वर्तमान रुपये पर सरकारी मूल्य ₹200 को ₹1 घोषित कर देंगे। इस तरह अपने आप महंगाई का भावनात्मक प्रचार पूरी तरह बंद हो जाएगा। डॉलर भी आधे रुपये में मिलने लग जाएगा।

हम वस्तुओं के आपसी आदान-प्रदान को भी छूट दे देंगे, क्योंकि सभी प्रकार के टैक्स समाप्त होने के बाद निजी मुद्रा चलाने में कोई दिक्कत नहीं आएगी।

इस तरह हम अर्थव्यवस्था का पूरा विकेंद्रीकरण कर देंगे और नई सामाजिक अर्थनीति स्थापित करेंगे, जिसमें सरकार की भूमिका सिर्फ सुरक्षा और न्याय तक सीमित रहेगी।