ममता बनर्जी के शासनकाल पर उठते कठिन सवाल

 

पश्चिम बंगाल से ममता बनर्जी के शासनकाल से जुड़ी अनेक घटनाएँ अब सामने आ रही हैं। आज 24 परगना जिले के पंचायत समिति के एक अध्यक्ष, रवेलू इस्लाम, की कहानी भी दिल दहलाने वाली बताई जा रही है। कहा जाता है कि इस प्रकार का एक छोटा-सा नेता भी इतना प्रभावशाली और भय पैदा करने वाला था कि पूरे क्षेत्र में उसके विरुद्ध बोलने की किसी की हिम्मत नहीं होती थी। पुलिस भी कोई कार्रवाई नहीं कर सकती थी, क्योंकि उस पर ममता बनर्जी का वरदहस्त माना जाता था।

यह एक गंभीर प्रश्न खड़ा करता है कि ममता बनर्जी ऐसे लोगों को इतनी सुविधाएँ और संरक्षण क्यों देती थीं। यहाँ तक कि बांग्लादेशी मुसलमानों को भी भारत में सुविधाएँ दिए जाने की बातें कही जाती रही हैं। मुसलमानों को इतनी अधिक छूट देने के पीछे क्या कारण थे, यह तो भविष्य में ही स्पष्ट हो सकेगा, लेकिन अब यह बात देश के लिए घातक सिद्ध हुई है—ऐसा अनेक लोगों का मत है।

जिस प्रकार कट मनी की घटनाएँ सामने आ रही हैं, वे भी साधारण नहीं हैं। पूरे भारत में भ्रष्टाचार विभिन्न रूपों में मौजूद है, लेकिन जिस प्रकार की कट मनी प्रणाली बंगाल में विकसित हुई, वह अत्यंत विचित्र और चिंताजनक बताई जाती है।

हम बंगाल में मुसलमानों द्वारा किए जाने वाले अत्याचारों की घटनाओं के बारे में सुनते थे, लेकिन वे हमें अतिरंजित लगती थीं। ऐसा प्रतीत होता था कि भाजपा उन्हें बढ़ा-चढ़ाकर प्रस्तुत कर रही है। किंतु अब कुछ लोगों को ऐसा लगने लगा है कि जिन घटनाओं का वर्णन किया जा रहा था, वास्तविकता संभवतः उससे भी अधिक गंभीर रही होगी।

ममता बनर्जी को इस प्रकार के कथित कार्यों के लिए क्या दंड मिलेगा, यह तो मैं नहीं कह सकता। किंतु एक महिला नेता के रूप में उनके शासनकाल के दौरान जिन घटनाओं और आरोपों की चर्चा हो रही है, वे निश्चित रूप से गंभीर चिंतन का विषय हैं।

ममता बनर्जी की पार्टी के सांसद Kirti Azad और Shatrughan Sinha भी अब खुलकर यह कहने की स्थिति में दिखाई नहीं देते कि ममता बनर्जी पूरी तरह सही थीं।