विपक्ष की दोहरी दलील: जीत की तैयारी या अस्तित्व का संकट?

पिछले कुछ वर्षों से भारत की आम जनता राजनीतिक दृष्टि से जागरूक हो रही है, लेकिन भारत के विपक्षी दल अभी तक यह बात मानने के लिए तैयार नहीं हैं। भारत के विपक्षी नेता या तो स्वयं मूर्ख हैं अथवा आम जनता को मूर्ख समझते हैं। उन्होंने जोर-शोर से यह बात कहनी शुरू की है कि सत्तारूढ़ दल विपक्ष को खत्म करना चाहता है, जबकि विपक्ष का होना लोकतंत्र में बहुत जरूरी है। सत्तारूढ़ दल दो-तिहाई बहुमत प्राप्त करके संविधान में भी मनमाने बदलाव करना चाहता है, जो किसी भी दृष्टि से उचित नहीं है। लोकतंत्र को सत्तारूढ़ दल से अब खतरा है क्योंकि विपक्ष को समाप्त किया जा रहा है।

दूसरी ओर, यही विपक्षी दल जोर-शोर से यह बात कहते हैं कि हम तो चुनाव जीतने की स्थिति में हैं। भारत की जनता तो अब हमें ही पसंद कर रही है। राहुल गांधी ने तो यह भी कहा है कि हम तो अब चुनाव जीत चुके हैं, सिर्फ 2019 में घोषणा होना बाकी है।

अब आप विचार कीजिए कि विपक्ष की इन दोनों बातों में से कौन-सी बात वे सच कह रहे हैं और कौन-सी झूठ, क्योंकि दोनों बातें एक साथ तो हो नहीं सकतीं। एक तरफ विपक्ष चुनाव जीतने की स्थिति भी मान रहा है और दूसरी तरफ विपक्ष के समाप्त होने की भी चिंता कर रहा है। मैं चाहता हूँ कि विपक्ष अपनी बात साफ करे।