भय के भविष्यवक्ता और भ्रम का व्यापार

भारत में आपको कई भविष्यवक्ता मिल जाएंगे जो बे सिर पैर की बातें बोलकर समाज में भय पैदा करते हैं और इस भय को ही अपनी सफलता मानते हैं। एक ऐसे ही भविष्यवक्ता ने यह बात बताई है कि एक क्विंटल धान पैदा करने में एक लाख लीटर पानी खर्च हो जाता है। इसी तरह एक दूसरे भविष्यवक्ता ने यह भी बताया है कि 100 लीटर कृत्रिम पेट्रोल बनाने में एक लाख लीटर पानी खर्च हो जाता है और इन दोनों ने मिलकर यह कहा है कि यदि हम लोग इसी तरह धान और गन्ने का उत्पादन करते रहे तो भविष्य में पानी का संकट आ जाएगा। एक तीसरे जल पुरुष ने यह भी घोषणा की है कि दुनिया पानी के लिए युद्ध करेगी। एक चौथे भविष्यवक्ता ने यह भी घोषणा की है कि जल्दी भारत की अर्थव्यवस्था रसातल में चली जाएगी, आपातकाल लग जाएगा, सरकार गिर जाएगी। ऐसे ही किसी भविष्यवक्ता ने यह भी कहा है कि समुद्र में बाढ़ आ जाएगी, किनारे के इलाके डूब जाएंगे, शहर बर्बाद हो जाएंगे और पता नहीं क्या-क्या हो जाएगा।

यदि इन सारे भविष्यवक्ताओं को आप एक साथ जोड़कर देखें तो यह साफ हो जाएगा कि यह सिर्फ समाज में अनावश्यक भय पैदा करके अपनी दुकानदारी कर रहे हैं, जबकि किसी भी बात में कोई सच्चाई नहीं है। यदि ऐसा कुछ हजारों वर्षों में होना भी है तो यह वैज्ञानिकों के शोध का विषय है, आम जनता का मामला नहीं है। दुर्भाग्य से विदेशी संस्थाएं इस प्रकार के भविष्यवक्ताओं को सम्मानित करके प्रमाणित भी कर देती हैं, जबकि यह सब बे सिर पैर की बातें हैं और इस तरह की बातों पर भरोसा नहीं करना चाहिए।