घटती गरीबी के बीच श्रम शोषण और असमानता पर नया विमर्श
19 जून प्रातःकालीन सत्र
भारत में दुनिया के अन्य अनेक देशों की तुलना में गरीबी लगातार घट रही है। आम नागरिकों का जीवन स्तर ऊँचा हो रहा है। सोना, चाँदी और जमीन के दाम लगातार बढ़ रहे हैं। इस सच्चाई के बाद भी कुछ लोग गरीबी बढ़ने का झूठा प्रचार कर रहे हैं, जबकि सच बात यह है कि गरीबी घट रही है।
आर्थिक असमानता बढ़ रही है, श्रम शोषण बढ़ रहा है, लेकिन आर्थिक असमानता और श्रम शोषण पर से ध्यान हटाने के लिए गरीबी और महँगाई का हल्ला किया जाता है। हम नई व्यवस्था में गरीबी की एक साफ-सुथरी, स्पष्ट परिभाषा बता देंगे। उस परिभाषा के नीचे रहने वाले व्यक्ति को ही गरीब माना जाएगा, उसके ऊपर वाले को नहीं।
वर्तमान समय में जो गरीबी रेखा की परिभाषा बनी हुई है, वह या तो गलत है या अपर्याप्त है। भारत में अब गरीबी है ही नहीं; कुछ अपवादस्वरूप व्यक्ति गरीब हो सकते हैं। इसलिए अब गरीबी और अमीरी इन शब्दों का कोई उपयोग नहीं है। हर आदमी ऊपर वाले की तुलना में गरीब होता है और नीचे वाले की तुलना में अमीर होता है। इसलिए इन दोनों शब्दों को अब बंद कर देने की जरूरत है।
कोई भी व्यक्ति न स्थायी रूप से गरीब है, न अमीर। यह सापेक्ष शब्द हैं।
Comments