नई समाज व्यवस्था: व्यक्ति, नागरिक और द्विस्तरीय शासन की अवधारणा
20 जून प्रातःकालीन सत्र
नई समाज व्यवस्था द्विस्तरीय होगी। एक व्यवस्था समाज की होगी और एक व्यवस्था संविधान की होगी। समाज की व्यवस्था परिवार से शुरू होगी और राज्य की व्यवस्था केंद्र सरकार से शुरू होगी। समाज की व्यवस्था नीचे से ऊपर की तरफ क्रमशः जाएगी। नीचे वाले ऊपर वालों को अधिकार देंगे, ऊपर वाले कोई मनमानी नहीं कर सकेंगे। राज्य की व्यवस्था में ऊपर वाले नीचे वालों को अधिकार देंगे, नीचे वाले कोई मनमानी नहीं कर सकेंगे।
व्यक्ति और नागरिक, ये दोनों भूमिकाएँ अलग-अलग होती हैं। व्यक्ति वह होते हैं जो समाज के अंग होते हैं और नागरिक संविधान से चलते हैं। नागरिकों को अधिकार संविधान देता है और व्यक्ति के अधिकार प्रकृति-प्रदत्त होते हैं। इस तरह प्रत्येक व्यक्ति समाज को अधिकार देता है। व्यक्तियों से समाज बनता है और संविधान नागरिकों का निर्माण करता है।
व्यक्ति और नागरिक को अलग-अलग समझने की आवश्यकता है। प्रत्येक व्यक्ति नागरिक नहीं होता, लेकिन प्रत्येक नागरिक व्यक्ति तो होता ही है। इस तरह नागरिक और व्यक्ति के अलग-अलग अधिकार, दायित्व और कर्तव्य होते हैं। सबकी भूमिकाएँ भी अलग-अलग होती हैं।
वर्तमान दुनिया में इन दोनों का अलग-अलग अस्तित्व गड़बड़ा गया है। हम इसको पूरी तरह अलग-अलग कर देंगे। व्यक्ति और नागरिक बिल्कुल अलग-अलग रहेंगे, यद्यपि प्राथमिक अवस्था में दोनों एक हो सकते हैं।
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