जम्मू-कश्मीर की घटना ने खोली कल्याणकारी योजनाओं की कमजोरियाँ
जम्मू-कश्मीर से एक हैरान करने वाला समाचार आया है कि वहाँ के एक-दो अस्पतालों में 50 ऐसे मरीजों को पेसमेकर लगा दिया गया, जिनको पेसमेकर की जरूरत नहीं थी और यह पैसा सरकारी खजाने से निकाला गया, क्योंकि सरकार ने इस तरह के रोगियों को मुफ्त इलाज का वचन दिया है। अब आप विचार करिए कि मुफ्त इलाज योजना और सरकार की व्यवस्था कितनी चाक-चौबंद है और इसमें रोगियों को कितना लाभ है, कितना नुकसान है।
इस तरह का भ्रष्टाचार सिर्फ एक ही मामले में नहीं है। अन्य जगहों पर भी, जहाँ-जहाँ सरकार के चरण पड़ते हैं, वहाँ-वहाँ भ्रष्टाचार के अवसर पैदा होते हैं और फिर उस भ्रष्टाचार की रोकथाम के लिए नई-नई व्यवस्थाएँ होती हैं, जो इस तरह के भ्रष्टाचारों को और बढ़ावा देती हैं।
अब इस श्रीनगर की पेसमेकर घटना के बाद इस तरह के भ्रष्टाचारों की रोकथाम के लिए एक और नई व्यवस्था बनाई जाएगी, जो व्यवस्था स्वयं भ्रष्ट होगी। इसलिए मैं लगातार सुझाव देता हूँ कि भ्रष्टाचार का समाधान सिर्फ निजीकरण है और कुछ नहीं। आप किसी भ्रष्ट व्यवस्था से भ्रष्टाचार की रोकथाम की उम्मीद नहीं कर सकते।
मैं मानता हूँ कि वर्तमान समय में नीट में हुए भ्रष्टाचार की रोकथाम के लिए इतनी ज्यादा ताकत लगानी पड़ी, लेकिन नीट परीक्षा को प्रतिष्ठा का प्रश्न बनाकर इतना धन दुरुपयोग हुआ, यह कोई सफलता नहीं मानी जाएगी।
इसलिए अधिकांश सरकारी विभागों को बंद करके पूरी तरह निजीकरण कर दीजिए। जो धन सरकार के पास बचता है, वह या तो आप जीएसटी खत्म कर दीजिए अथवा वह आम लोगों में बराबर-बराबर बाँट दीजिए। वे अपना इलाज कर लेंगे, वे अपनी शिक्षा प्राप्त कर लेंगे, वे नीट अपने आप कर लेंगे। आपकी भ्रष्ट व्यवस्था को उसमें कोई हस्तक्षेप करने की जरूरत नहीं है।
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