नई समाज व्यवस्था में अपराध नियंत्रण का मॉडल
23 जून प्रातःकालीन सत्र
हमारी प्रमुख प्राथमिकता होगी कि हम अपराध-मुक्त समाज बना सकें। हम इसके लिए यह परिभाषा तय करेंगे कि जिस जिले में एक प्रतिशत से कम अपराधी होंगे, उस जिले को हम अपराध-मुक्त घोषित कर देंगे। जिस जिले में 1 से 2 प्रतिशत तक अपराधी होंगे, उस जिले को हम अपराध-नियंत्रित घोषित कर देंगे और जिस जिले में 2 प्रतिशत से अधिक अपराधी होंगे, उस जिले को हम अपराध-युक्त मानेंगे तथा वहाँ विशेष प्रावधान लागू करेंगे।
इस तरह हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता यही होगी। इसके लिए हम विशेष प्रावधान करेंगे। पहली बात यह है कि हम अपराधों की परिभाषा सुधार देंगे। अर्थात हिंसा और जालसाजी को छोड़कर बाकी सारे कार्य अपराध-मुक्त माने जाएँगे, भले ही वे गैरकानूनी हों।
चोरी, डकैती, लूट, बलात्कार, जालसाजी, धोखाधड़ी, मिलावट, कम तौल तथा किसी भी प्रकार का बल प्रयोग — सिर्फ यही कार्य अपराध माने जाएँगे, अन्य नहीं।
जिस जिले में 2 प्रतिशत से अधिक अपराधी होंगे, उन जिलों में हम विशेष प्रावधान बनाएँगे और वहाँ अपराधियों में डर पैदा करने के लिए गुप्तचर-न्यायाधीश प्रणाली भी बनाएँगे। हम चाहेंगे कि लोकतंत्र अपराध-नियंत्रण में कहीं बाधक न बन सके।
इस प्रकार हम पूरे समाज को अपराध-नियंत्रित समाज की गारंटी देंगे।
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