ईरान: शक्ति प्रदर्शन या भय का विरोधाभास?
आजकल ईरान बहुत चर्चा में है। ईरान के राष्ट्रपति और सर्वोच्च धर्मगुरु ने स्पष्ट किया है कि वे अपनी जान की परवाह नहीं करते। वे देश के लिए अपनी जान देने के लिए तैयार हैं। साथ ही उन्होंने इज़राइल को बर्बाद करने की भी चेतावनी दी है। खामनेई के जनाज़े में भी कुछ लोगों ने अमेरिका के राष्ट्रपति और इज़राइल के प्रधानमंत्री की हत्या करने की धमकी दी है।
आश्चर्य है कि ईरान कहता है कि वह दुनिया में किसी से डरता नहीं है। वह इज़राइल को बर्बाद करेगा ही, वह इज़राइल और अमेरिका के प्रमुख नेताओं की हत्या भी करने के लिए तैयार है। दूसरी ओर वहाँ का प्रमुख मुजतबा एक बिल में घुसा हुआ है। उसे अपनी जान का इतना डर है कि वह अपने पिता के जनाज़े में भी शामिल नहीं हो रहा, क्योंकि ईरान भले ही बर्बाद हो जाए, लेकिन मुजतबा की जान बचनी चाहिए।
ऐसा चूहा, जो इज़राइल के डर से अपने बिल से बाहर नहीं निकल रहा है, वह इज़राइल और अमेरिका को धमकी दे रहा है। आश्चर्य की बात है।
ईरान के सामने यह तय करना होगा कि वह दुनिया की सहानुभूति चाहता है या वह दुनिया को अपनी ताकत दिखाना चाहता है। या तो मुजतबा को हिम्मत करके जनाज़े में जाना चाहिए था, अन्यथा चुप रहना चाहिए था। एक तरफ डरपोक की तरह छिपे रहना और दूसरी तरफ इज़राइल को ललकारना, यह कमजोरी की निशानी है।
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